हिमाचल प्रदेश: वीरभद्र सिंह की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन, बेटे विक्रमादित्य सिंह बने बुशहर के 123वें राजा

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बुशहर रियासत के राजा वीरभद्र सिंह का अंतिम संस्कार हो गया। विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह ने उनके शव को मुखाग्नि दी। इससे पहले रामपुर स्थित राज दरबार पदम पैलेस में सुबह नौ बजे वीरभद्र सिंह की पार्थिव देह के सामने पर्दे में बेटे विक्रमादित्य सिंह का राजसी परंपरा के तहत राजतिलक हुआ। औपचारिक रूप से उन्हें राजगद्दी सौंपी गई। इसके साथ ही विक्रमादित्य सिंह बुशहर रियासत के 123वें राजा बने हैं। बंद कमरे में राज पुरोहितों ने राजतिलक की परंपरा का अनुष्ठान करवाया। इस दौरान पारंपरिक लोकवाद्य यंत्रों की ध्वनियों से राजा की रियासत गूंज उठी।

इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे वीरभद्र सिंह की अंतिम शवयात्रा निकली। रामपुर के जोबनी बाग में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुबह से ही हजारों की संख्या में लोगों के पहुंचने का क्रम जारी है। शिमला, किन्नौर, मंडी, कुल्लू के अलावा प्रदेशभर से लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे। वीरभद्र सिंह के अंतिम संस्कार में हिमाचल के कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस नेता आंनद शर्मा , मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और भाजपा के अन्य नेता भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए

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इससे पहले लोगों ने वीरभद्र सिंह के हरिद्वार में क्रिया कर्म के लिए पारंपरिक अंशदान दिया। हर किसी ने अपनी क्षमता के अनुसार रुपए दिए। बुशहर रियासत के अलावा कुल्लू रियासत के लोगों ने भी पारंपरिक अंशदान दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की शवयात्रा में 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। इसके लिए प्रशासन और पुलिस ने पुख्ता बंदोबस्त किए थे। बता दें कि जोबनी बाग श्मशान घाट में राज परिवार से संबंध रखने वाले राजा और रानियों के लिए विशेष स्थान है। यहां वर्षों पहले मृत्यु प्राप्त कर चुके राजा और रानियों के शिलालेख और चित्र आज भी मौजूद हैं।

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