रामायण में जाति के आधार पर तय किए गए थे किरदार, जानिए दिलचस्प तथ्य

नई दिल्ली। दुनिया के लाखों टेलीविजन पर छा जाने वाले रामानन्द सागर के धारावाहिक “रामायण” को करीब 33 साल हो चुके हैं। मशहूर निर्माता निर्देशक रामानंद सागर 1987 में दूरदर्शन पर धाराविक ‘रामायण’ लेकर आए। रामानंद सागर ने जब रामायण का निर्माण किया था तो वह भी नहीं जानते थे कि रामायण लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। अब जब कोरोना वायरस के चलते देश व्यापी लॉकडाउन के बीच रामायण का प्रसारण हो रहा है कि तो दूरदर्शन बाकी टीवी चैनलों से काफी आगे निकल गया था। टीआरपी के मामले में उसने दोबारा कई रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस मौके पर जानते हैं रामायण से जुड़ी दिलचस्प बातें।

रामानंद सागर ने सीरियल शुरू करने से पहले ही सभी कलाकारों से सात्विक खान-पान, रहन-सहन का एग्रीमेंट किया था। सीरियल पूरे चार सालों में बना और कलाकारों को इस बीच नॉनवेज, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग या अन्य दुव्र्यसनों से दूर रहना पड़ा। जो एक्टर इनके आदी थे, उन्हें रामानंद सागर के इस नियम से खीज होती थी। चार साल बाद वही एक्टर पूरी तरह सात्विक बनकर निकले और आज भी उन्हीं नियमों पर चल रहे हैं।

रामानंद सागर ने सीरियल को जीवंत बनाने के लिए मुख्य पात्रों के लिए जाति के अनुरूप किरदार तय किए थे। अरुण गोविल क्षत्रिय थे तो उन्हें श्रीराम बनाया गया। रावण के किरदार के लिए ब्राह्मण कुल में पैदा हुए अरविंद त्रिवेदी को चुना गया। रामायण देखने के लिए आलम यह होता था कि लोग रविवार की सुबह का बडी बेसब्री से इंतजार करते थे। एक टेलीविजन सेट पर गांव और मुहल्ले के लोगों का हुजूम उमड पडता था। बस और ट्रकों के ड्राइवर अपने वाहनों को ब्रेक लगाकर रामायण देखने के लिए किसी ढाबे में लगे टेलीविजन से चिपक जाते थे।

निर्माता रामानंद सागर को एक महिला ने चिट्ठी लिखी कि जब भी ‘रामायण’ टीवी पर आता है, तो वह अपने अंधे बेटे को टीवी छूने को कहती है, इस विश्वास से कि उसकी आँखों की रोशनी लौट आएगी। यह सीरियल ‘रामायण ग्रंथ’ जैसा पवित्र माना जाने लगा। रामायण जब अपने लोकप्रियता के चरम पर था तो कहा जाता है कि प्रसारण के समय पूरा देश मानो रूक कर केवल रामायण देखता था। सड़कों पर बस नहीं चला करती थी क्योंकि उसके यात्री टीवी के सामने बैठकर रामायण देख रहे होते थे।

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‘रामायण’ टीवी पर आने वाला ऐसा इकलौता धारावाहिक बना जिसे 45 मिनट का टीवी स्लॉट मिला। जबकि उन दिनों दूरदर्शन पर सिर्फ आधे घंटे और एक घंटे के स्लॉट ही कार्यक्रमों को मिला करते थे। दूरदर्शन ने रामानंद सागर को जब रविवार सुबह 9:30 बजे का टाइम दिया तो यह स्लॉट टीवी उद्योग में कम लोकप्रिय समय में गिना जाता था लेकिन रामायण के हिट होने के बाद इस स्लॉट को सबसे हिट स्लॉट के रूप में देखा जाता है।

निर्देशक रामानंद सागर, रामायण बनाने का प्रस्ताव लेकर जिस भी निर्माता के पास गए उसने उन्हें वापसी का रास्ता दिखा दिया। टीवी के लिए ‘रामायण’ बनाने का सौदा किसी को फ़ायदा का नहीं लगा। इसपर पैसा लगाने से पैसा डूब जाएगा। हालांकि हुआ ठीक इसका उल्टा रामानंद सागर ने अपने ही प्रोडक्शन हाउस सागर आर्ट्स के बैनर तले इसका निर्माण किया । एक अनुमान के मुताबिक रामायण के एक एपिसोड को बनाने का खर्च लगभग 1 लाख रुपये के आसपास था जो उस समय बहुत ज्यादा था। यह भारतीय टीवी इतिहास की सबसे कमाई करने वाली सीरियल में से एक है।

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