कोरोना महामारी में भी घूसखोरों ने उठाया फायदा, 40 हजार से ज्यादा लोगों ने की शिकायतें

भारत में कोरोना जैसी महामारी में भी घूसखारों फायदा उठाने का कोई मौका नही छोड़ा। केंद्र को कोरोना वायरस से सम्बंधित भ्रष्टाचार की 40,000 शिकायतें मिली हैं। मंत्रालय द्वारा हल की जाने वाली इन भ्रष्टाचार की शिकायतों में कोरोना वायरस से जुड़े मामले शामिल हैं। इनमें कोरोना वायरस से निपटने के दौरान रिश्वतखोरी, सरकारी अधिकारियों द्वारा गबन और उत्पीड़न जैसी मामले शामिल है।

इस साल अप्रैल में, सरकार ने कोरोना वायरस से सम्बंधित किसी भी तरह की शिकायत का त्वरित समाधान करने के लिए एक पोर्टल बनाया था। उसपर अब तक 1,67,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिसमें से लगभग 1,50,000 शिकायतों को सम्बोधित किया गया है। ये वो शिकायतें थी जिन्हें प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की वेबसाइट पर डाला गया था।

एक अधिकारी ने बताया कि यह मुद्दा सबसे पहले 25 नवंबर को ‘प्रगति’ (प्रो-एक्टिव-गवर्नेन्स एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की बैठक में सामने आया था। ‘प्रगति’ में विभिन्न मंत्रालय शामिल हैं। यह सरकार की प्रशासनिक सुधार के लिए की गई पहल है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। अधिकारी ने बताया, “बैठक में प्रधानमंत्री भी शामिल थे। वह जानना चाहते थे कि भ्रष्टाचार के मामलें में कितनी शिकायतें मिली हैं और आखिर उन्हें किस प्रकार संभाला गया।”

अधिकारी ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जो जो डाटा मांगा है उसे समेटा जा रहा है। सोमवार को बैठक में उनके सामने वह प्रस्तुत किया जाएगा। पीएम शिकायतों की प्रवृति जानना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने तीन पी- पर्सन, प्रोसेस और पालिसी की मांग की है।

ज्यादातर शिकायतें हैं बेहद आम समस्याओं के बारे में

कोविड-19 से सम्बंधित ज्यादातर शिकायतें, वीजा की मंजूरी, विदेश में फंसे भारतीयों को वापिस लाना और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता के संदर्भ में हैं।

जिन श्रेणियों के तहत शिकायतें दर्ज की है जाती हैं, वे हैं- अस्पतालों में अपर्याप्त सुविधाएं, पीएमकेयर्स निधि के लिए दान करने में समस्या, विदेश से भारतीयों को लाना, लॉकडाउन में कहीं फंस जाना, कोरोना के लिए जारी की गई एडवाइजरी का पालन न करना जैसी समस्याएं हैं।

 

 

 

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