संजीव भट्ट को जमानत दिलाने के लिए भारतीय अमेरिकी संगठन ने की सुप्रीम कोर्ट से अपील

वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के कई नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने सोमवार को पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट की जमानत मंजूर करने का मागं करते हुए भारत के उच्चतम न्यायालय से अपील की। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल आईएएमसी और हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि हत्या के एक मामले में भट्ट की दोषसिद्धि गलत है यह सभी झूठे सबूतों पर आधारित है। न्यायालय 22 जनवरी को भट्ट की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शशि थरूर ने कहा कि वह भट्ट के साथ हुए अन्याय के प्रति बेहद दुखी हैं, जिन्हें समाज के लिए कर्तव्यनिष्ठ होकर सेवा करने और ताकतवर से सच बोलने की अदम्य क्षमता के कारण जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही थरूर ने कहा,कि संजीव का मामला उस खराब दौर को दर्शाता है, जिसमें हम जी रहे हैं, जहां सभी भारतीयों को संविधान द्वारा प्रदत्त संवैधानिक मूल्य एवं मौलिक अधिकार कई मामलों में कमजोर होते और कई बार ऐसी ताकतों द्वारा छीने जाते भी प्रतीत होते हैं साथ ही कहा कि, जिन भारतीयों की अंतरात्मा संजीव भट्ट की तरह जीवित है, उन्हें खड़े होना चाहिए और इस प्रकार की चुनौतियों के खिलाफ लड़ना चाहिए, जो हमारे गणतंत्र के आधार को कमजोर करने का खतरा पैदा कर रही हैं।

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प्रख्यात फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन ने कहा कि भट्ट को इसलिए जेल भेजा गया क्योंकि उन्होंने 2002 में हुए नरसंहार का विरोध करते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके साथ ही मानवाधिकार के एक कार्यकर्ता शास्त्रीय नृत्यांगना और अभिनेत्री मल्लिका साराभाई ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल भट्ट के मामले में उनके खिलाफ निश्चित एजेंडा चलाया जा रहा, बल्कि मोदी सरकार के अधिकतर आलोचकों के साथ ऐसा हो रहा। आईएएमसी के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद के अनुसार, भारत सरकार को संजीव भट्ट के मामले का राजनीतिक प्रबंधन बंद करके सरकार से डरे हुए या स्वयं राजनीतिक बन चुके न्यायाधीशों के बजाए स्वतंत्र न्यायाधीशों की निगरानी में कानून को अपना काम करने देने की इजाजत देनी चाहिए।

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