भारतीय रईशों में बढ़ी विदेश में बसने की चाहत, जानें अन्य देशों का हाल

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बावजूद देश के अमीर लोगों के बीच विदेश में बसने की चाहत कम नहीं हो रही है। बीते साल सबसे ज्यादा भारतीयों ने विदेश में बसने के लिए पूछताछ की है। हेनली एंड पार्टनर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के बाद अमेरिका, पाकिस्तान , साउथ अफ्रीका और नाइजीरिया के लोग विदेश में बसना चाहते हैं।

हेनली एंड पार्टनर्स का दावा है कि कोरोना के लिए हमेशा याद रखे जाने वाले साल 2020 में भी भारतीय अमीरों ने सबसे अधिक बार ‘निवेश के जरिए निवास’ और ‘निवेश के जरिए नागरिकता’ कार्यक्रमों के बारे में पूछताछ की। दरअसल, भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है, इसलिए किसी अन्य देश में नागरिकता लेने के लिए भारत की नागरिकता छोड़नी होगी। ऐसे लोगों के लिए ‘निवेश के जरिए नागरिकता’ कार्यक्रम कारगर माना जाता है। दूसरे देशों में बसने की चाहत को लेकर 2019 के मुकाबले भारतीयों द्वारा पूछताछ में 63 फीसदी का उछाल आया है। साल 2019 में 7000 भारतीयों ने देश छोड़ा था। इसमें दो फीसदी उच्च नेटवर्थ वाले भारतीय शामिल हैं।

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हेनली पार्टनर्स के वैश्विक साउथ एशिया टीम के निदेशक निर्भय हांडा ने कहा कि साल 2019 की तुलना में 2020 में भारतीयों द्वारा की गई जांच में 62.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। अमीर लोग बेहतर लाइफस्टाइल के लिए इन प्रोग्राम को अपनाते हैं। इसके अलावा दूसरा पासपोर्ट होने पर उन्हें वैश्विक ट्रैवलिंग में काफी राहत मिलती है। जैसे ऑस्ट्रिया के पासपोर्ट पर 187 देशों के लिए वीजा-फ्री ट्रैवल की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, माल्टा और ऑस्ट्रिया द्वारा प्रस्तावित नागरिकता कार्यक्रम के तहत यूरोपीय संघ में कहीं भी निवास करने का विकल्प मिलता है। इसके अलावा दुबई, हांगकांग और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्त केंद्रों में पेशेवर एनआरआई की बड़ी आबादी है।

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