ब्रिटेन : 10 लाख डॉलर के ग्लोबल टीचर प्राइज की दौड़ में भारतीय शिक्षिका शामिल

अनूठे तरीके से भौतिकी पढ़ाने वाली एक भारतीय शिक्षिका उन शीर्ष 50 दावेदारों में शामिल हैं, जो 10 लाख डॉलर के वैश्विक पुरस्कार की दौड़ में हैं. इस शिक्षिका को उनके भौतिकी पढ़ाने के प्रयोगधर्मी अंदाज के लिए पहचाना जाता है.

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कविता ने कहा, कुछ दिन पहले, जब से जानकारी मिली है और मैंने अपना नाम शीर्ष 50 में देखा है, तब से मैं बादलों पर चल रही हूं, मुस्कुरा रही हूं और उन सभी लोगों के प्रति एक आभार महसूस कर रही हूं, जिन्होंने पेशेवर तौर पर मेरी ताकत और क्षमताओं को विकसित करने में मेरी मदद की. उन्होंने कहा, यह पहचान मुझे वाकई खास महसूस कराती है और मुझे मेरी योग्यताओं एवं क्षमताओं को और अधिक विकसित करने के लिए प्रेरित करती है. यह पुरस्कार मुझे लगातार याद दिलाता रहेगा कि मैं अपने छात्रों और शिक्षकों के शैक्षणिक, पर्यावरणीय और सामाजिक विकास को लेकर समुदाय के प्रति जिम्मेदार एवं जवाबदेह हूं.

ग्लोबल टीचर प्राइज का यह तीसरा साल है. इसकी स्थापना भारतीय मूल के उद्यमी सनी वारके ने की थी. इस पुरस्कार का उद्देश्य उस एक अद्भुत शिक्षक की पहचान करना है, जिसने अपने पेशे में अनूठा योगदान दिया हो. इसके साथ ही इसका उद्देश्य समाज में शिक्षकों की अहम भूमिका पर रोशनी डालना भी है. चुने गए अंतिम 10 उम्मीदवारों को पुरस्कार समारोह के लिए अगले साल 19 मार्च को दुबई में आयोजित किए जाने वाले वार्षिक ग्लोबल एजुकेशन एंड स्किल्स फोरम में बुलाया जाएगा. यहां सीधे प्रसारण के दौरान विजेता के नाम की घोषणा की जाएगी.

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द ग्लोबल टीचर प्राइज 2017 की ओर से मुंबई के एमईटी रिषीकुल विद्यालय की प्रधानाचार्य कविता सांघवी को भौतिकी जैसे जटिल विषय को दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए दावेदारों में शामिल किया गया है. उन्होंने अपने छात्रों को किताबी सिद्धांतों को असल जिंदगी की स्थितियों से जोड़कर देखने में मदद की.

इस साल की सूची में एकमात्र भारतीय कविता सांघवी ने भारत लौटने से टोरंटो में भौतिकी की पढ़ाई की थी. उन्हें ब्रिटिश काउंसिल ने अपने ग्लोबल टीचर्स एक्रीडिएशन प्रोग्राम के तहत चुना था. उन्हें इससे पहले कई पुरस्कार मिल चुके हैं.

ब्रिटेन आधारित वारके फाउंडेशन के संस्थापक सनी वारके ने कहा, इस साल ग्लोबल टीचर प्राइज को मिले व्यापक समर्थन से हम अभीभूत हैं. शिक्षकों को समाज में सबसे अधिक सम्मानित पेशे से जुड़े होने का दर्जा वापस दिलाने के हमारे इस सफर में हमारा इरादा इस संवेग को बनाए रखने का है.

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