ढाई दशक की लड़ाई के बाद ISRO वैज्ञानिक नांबी नारायणन को मिला इंसाफ, केरल सरकार ने दिया 1.30 करोड़ का मुआवजा

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को केरल सरकार ने साल 1994 के एक​ जासूसी मामले में 1.30 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है। बता दें कि इस मामले नांबी नारायणन को फर्जी ढंग से फंसाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद केरल सरकार ने बीते वर्ष नांबी नारायणन को 1.30 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दे दी थी।

पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन के मुताबिक, उनके सहयोगी और करीबी रहे दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने आरोप मुक्त होने के बाद उन्हें मुकदमे से बचने की सलाह दी थी। लेकिन वह गुनाहगारों को सजा दिलाने और मुआवजा पाने को लेकर वह अडिग थे। माना जाता है कि यह प्रकरण राजनीतिक खींचतान का नतीजा था। इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक वर्ग ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के करुणाकरण को निशाना बनाया। इस वजह से उन्हें बाद में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसरो के वैज्ञानिक नांबी नारायणन को उस गुनाह के लिए सजा और जिल्लत झेलनी पड़ी, जो कभी हुई ही नहीं।

यह था पूरा मामला

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केरल पुलिस ने साल 1994 में इसरो के वैज्ञानिक नांबी नारायणन को राकेट के क्रायोजेनिक इंजन की परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की चोरी कर मालदीव के रास्ते पाकिस्तान देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जबकि सच्चाई यह थी कि वह तकनीक मौजूद ही नहीं थी। नवंबर 1994 में गिरफ्तारी के बाद दिसंबर को जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई मामले की जांच में सबूत नहीं खोज पाई। इसके बाद 50 दिनों की कैद के बाद नारायणन को जनवरी 1995 में जमानत मिल गई। अप्रैल 1996 में सीबीआई ने माना मामला फर्जी था और केस बंद करने का अनुरोध किया। मई 1996 में मजिस्ट्रेट अदालत ने मामला खारिज कर सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी किया। 1996 में माकपा सरकार ने मामले पर दोबारा जांच शुरू करने की पहल की। इसके बाद 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला रद्द कर सभी को आरोप मुक्त किया। बरी होने के बाद साल 1999 में नारायणन ने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साल 2001 में एनएचआरसी ने सरकार से 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके बाद साल 2001 में केरल सरकार एनएचआरसी के फैसले को उच्च न्यायालयत में चुनौती दी। साल 2012 में केरल हाईकोर्ट ने एनएचआरसी के फैसले को बरकरार रखा। अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में नारायणन की याचिका पर सुनवाई शुरू की। गिरफ्तारी में शामिल पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मांग की थी।

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