जेद्दाह से भारत आकर पांच महीने में आयशा सरीहा ने हिफ्ज़ कुरान किया मुकम्मल

हाफिजों की बस्ती भटकल में ऐसे सैकड़ों हाफिज हैं जिन्होंने कम समय में कुरान याद किया है. लेकिन आयशा सरीहह ने पांच महीने में हिफ्ज़ कुरान मुकम्मल कर के एक नई मिसाल कायम की है. भटकल के अलकौसर गर्ल्स कॉलेज के हिफ्ज़ विभाग में शिक्षा प्राप्त कर रही आयशा सरीहा नामक छात्रा ने इतने कम समय में कुरान याद करके माता-पिता और टीचर के साथ अलकौसर कॉलेज का नाम भी रोशन किया है.

भटकल की अलकौसर गर्ल्स कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने वाली दसवीं पास एक छात्रा ने पांच महीनों में कुरान याद करके एक बड़ा कारनामा अंजाम दिया है. आयशा सरीहा नामक यह छात्रा अपने माता पिता के साथ जेद्दा में रहती है. इस छात्रा ने पांच महीने पहले ही अलकौसर गर्ल्स कॉलेज के हिफ्ज़ विभाग में दाखिला लिया था और इतनी कम अवधि में उसने कुरान याद करने का कारनामा अंजाम दिया. अपनी इस सफलता पर वह बहुत खुश है और सभी का शुक्रिया अदा कर रही है.
कॉलेज के सचिव मौलाना सैयद यासिर नदवी ने कॉलेज का परिचय कराते हुए मीडिया को बताया कि अलकौसर गर्ल्स कॉलेज में समकालीन आवश्यकताओं को सामने रख कर छात्राओं की धार्मिक आधार पर तरबियत दी जाती है. कॉलेज के हिफ्ज़ विभाग के आयोजक इस छात्रा के कारनामे पर बेहद खुशी व्यक्त कर रहे हैं.

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