जम्मू-कश्मीर: उप राज्यपाल का बड़ा फैसला, गैर राज्यों में शादी होने पर बेटियों के पति भी होंगे डोमिसाइल के हकदार

जम्मू। केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य की बेटियों को बड़ी राहत दी है। उपराज्यपाल के प्रशासन ने फैसला किया है कि जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर युवक या युवती को विवाहोपरांत डोमिसाइल का पात्र मान लिया है। उपराज्यपाल कार्यालय के सामान्य प्रशासन विभाग ने नए नियम की अधिसूचना जारी कर दी है। अब प्रदेश में डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर दूसरे राज्य की महिला या पुरुष भी अब डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल कर सरकारी नौकरी के पात्र होंगे।

अब तक 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहने, निर्धारित अवधि तक प्रदेश में सेवाएं देने और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के तहत ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र का प्रावधान था। अब सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों में सातवां क्लॉज जोड़ा है। अधिसूचना के अनुसार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 का प्रयोग कर जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (डीसेंट्रलाइजेशन एंड रिक्रूटमेंट) एक्ट 2010 की धारा 15 के तहत दिए गए नियमों के तहत सातवां क्लॉज जोड़ा गया है।

डोमिसाइल प्रमाणपत्र नियमों के इस सातवें क्लॉज में स्पाउस आफ डोमिसाइल की श्रेणी जोड़ी गई है। इसमें न तो पति और ना ही पत्नी का जिक्र किया गया है। यानी इस श्रेणी के आवेदक को डोमिसाइल के लिए अपने जीवनसाथी का डोमिसाइल प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र जमा करवाना होगा। ऐसे आवेदकों को तहसीलदार डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। जिला उपायुक्त अपील प्राधिकारी होंगे।

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दरअसल, अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बावजूद ऐसे मामलों में दिक्कतें आ रही थीं, जिसमें डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक से शादी करने पर भी डोमिसाइल नहीं मिल पा रहा था। दूसरे राज्यों की जो युवतियां शादी करने के बाद जम्मू-कश्मीर में रहती हैं, उनके लिए स्पष्ट नियम नहीं थे। सामान्य मामलों में डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए 15 वर्ष तक जम्मू-कश्मीर में रहना अनिवार्य है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों और उनके बच्चों के लिए प्रावधान हैं।

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