जेएनयू में अब भी लगे हैं कश्मीर की आजादी के नारे वाले पोस्टर

फरवरी 2016 में जेएनयू में कथित देश विरोधी नारे लगाए जाने के बाद देश भर में राष्ट्रवाद पर चर्चा छिड़ गई. घटना के बाद उस समय जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार को राष्ट्रद्रोह की धारा में गिरफ्तार किया गया. घटनाक्रम चलता रहा और आज पूरा एक साल बीतने के बाद भी जेएनयू प्रकरण मे चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई.

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, विश्वविद्यालय का कीमती वक्त और ऊर्जा ऐसे बेकार के विवादों में बर्बाद होती है। दुर्भाग्य से लोगों का एक छोटा समूह अब भी हंगामे का माहौल बनाना चाह रहा है और शैक्षणिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कर्मचारियों से पोस्टर हटाने को कहा है। वाम दल के एक छात्र ने बताया कि यह पोस्टर तीन-चार दिन से लगा हुआ था। लेकिन इसमें कुछ भी नया नहीं था क्योंकि डीएसयू इस तरह के पोस्टर अक्सर लगाता रहता है। बता दें कि 9 फरवरी की घटना के बाद उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को पूर्व जेएनयू छात्र संघ के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार समेत देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था, जो फिलहाल बेल पर बाहर हैं।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- यह संगठन करीब एक साल पहले जेएनयू में सक्रिय था. कैंपस में देशविरोधी नारे लगाने के आरोपी उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य इसके सदस्य थे. डीएसयू के पूर्व सदस्यों उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और अन्य ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के खिलाफ पिछले साल विवादास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें कथित तौर पर राष्टविरोधी नारेबाजी हुई थी. फिलहाल इस मुद्दे को लेकर उमर खालिद और अनिर्बान कुछ नहीं बोल रहे हैं.

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