जानिए राफेल की खूबी, पाकिस्तान और चीन के लिए बन गया है टेंशन

भारत ने फ्रांस से कुछ दिनो पहले ही 5 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे जो आज भारतीय वायुसेना का हिस्‍सा बन गये हैं। अंबाला एयरफोर्स स्‍टेशन पर इंडक्‍शन सेरेमनी में राफेल को औपचारिक रूप से IAF में शामिल किया गया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ले के सामने 17 स्कवॉड्रन ‘गोल्डन ऐरोज़’ के पायलट्स ने जौहर दिखाए। अंबाला के आसमान पर बड़ी आसानी से मैनूवर्स करते राफेल लड़ाकू विमानों को देखकर चीन और पाकिस्‍तान की धड़कनें जरूर तेज हो गई होंगी। राफेल आ जाने से भारतीय वायुसेना की ताकत में जो इजाफा हुआ है, उससे दोनों पड़ोसी देशों की नींद उड़ चुकी है। राफेल ने क्‍यों चीन और पाकिस्‍तान को टेंशन दे दी है, आइए समझते हैं।

आसमान में उड़ते ही गरजे तो चीन और पाकिस्तान तक सुनाई दी गूंज
फ्लाईपास्‍ट शुरू होते ही राफेल लड़ाकू विमान ने हवा में करतब दिखाने शुरू कर दिए। पांचों विमान अलग-अलग तरह के मैनूवर्स कर चीन और पाकिस्‍तान को साफ संदेश दे रहे थ‍े कि इसके वार से बच पाना बड़ा मुश्किल है।

कम स्‍पीड पर भी उड़ता है राफेल, पंगा लेना पड़ेगा महंगा

राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है। राफेल की रेंज 3,700 किलोमीटर है, यह अपने साथ चार मिसाइल ले जा सकता है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और ऊंचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विंगस्‍पैन सिर्फ 10.90 मीटर है जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मैनुवरिंग में आसानी होती है।

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चीन के जे-20 पर भारी पड़ेगा राफेल!

भारतीय राफेल के मुकाबले में चीन का चेंगदू J-20 और पाकिस्‍तान का JF-17 लड़ाकू विमान हैं। मगर ये दोनों ही राफेल के मुकाबले थोड़ा कमतर हैं। चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइटर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है। J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। J-20 की लंबाई 20.3 मीटर से 20.5 मीटर के बीच होती है। इसकी ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्‍पैन 12.88-13.50 मीटर के बीच है यानी यह राफेल से खासा बड़ा है। पाकिस्‍तान के पास मौजूद JF-17 में चीन ने PF-15 मिसाइलें जोड़ी हैं मगर फिर भी यह राफेल के मुकाबले में कमजोर है।

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