जानें कौन हैं जितिन प्रसाद, पिता ने सोनिया गांधी को दी थी चुनौती

नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार जितिन प्रसाद आज से भाजपाई हो गए हैं। जितिन प्रसाद कांग्रेस के उन चंद नेताओं में एक हैं, जिनकी दूसरी पी​ढ़ी कांग्रेस पार्टी से जुड़ी है। इनमें कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस में छटपटा रहे सचिन पायलट भी शामिल हैं। यूपी के शाहजहांपुर से ताल्लुक रखने वाले जितिन प्रसाद का बीजेपी में आना प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण हो सकता है।

बता दें कि जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद भी बगावती तेवर वाले नेता माने जाते थे। जितेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस का सांसद रहते हुए सोनिया गांधी के लगातार पार्टी अध्यक्ष बनने का विरोध किया था। जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ता के लिहाज से सोनिया गांधी से बहुत सीनियर थे। हालांकि, साल 2000 में जब पार्टी अध्यक्ष पद के लिए वह सोनिया गांधी के खिलाफ खड़े हुए तो उन्हें इसमें हार मिली।

जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के सलाहकार भी रह चुके हैं। जितिन प्रसाद को सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कांग्रेस से जुड़े परिवारों की विरासत संभालने वाले युवा नेताओं में माना जाता रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह ही जितिन का बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बात अगर जितिन प्रसाद की करें तो वह साल 2004 में पहली बार अपने गृह जनपद शाहजहांपुर से लोकसभा सांसद बने थे। इसके बाद साल 2008 में वह पीएम मनमोहन सिंह की कैबिनेट में मंत्री बने। उस समय वह सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे।
राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले जितिन प्रसाद कांग्रेस से दो बार सांसद रहे हैं।

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सूत्रों की मानें तो जितिन दो साल पहले ही पार्टी छोड़ने वाले थे। उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनावों के समय भी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जितिन प्रसाद को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन उस समय राज बब्बर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई, जो जितिन को रास नहीं आया।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बीते साल वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर बड़े बदलावों की मांग की थी। इन नेताओं के समूह को जी-23 के नाम से जाना जाता है। चिट्ठी लिखने वालों में से एक प्रमुख नाम जितिन प्रसाद का भी था। बता दें कि जितिन प्रसाद लंबे समय से ब्राह्मण समाज के हक में आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व से उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा था। यही वजह थी कि जब जितिन ने ब्रह्म चेतना सवांद कार्यक्रम की घोषणा की तो पार्टी ने इससे किनारा कर लिया।

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