लद्दाख में भारत और चीन में 45 साल बाद LAC पर चलीं गोलियां

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर भारतीय सेना की ओर से फायरिंग वाले चीनी दावे को भारत सरकार ने झुठला दिया है। चीन एलएसी पर खुद फायरिंग करके भारतीय सेना पर आरोप लगा रहा है। मगर भारत ने एक बार फिर से चीनी की झूठ से पर्दा हटा दिया है। भारत ने बयान जारी कर कहा है कि पीएलए के जवानों ने उकसावे की कार्रवाई की है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भारतीय सेना ने एलएसी यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फायरिंग नहीं की है और न ही पार की है। बल्कि कुछ जगहों पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ही फायरिंग की है।

दरअसल, सोमवार की रात चीनी सेना ने दावा किया कि पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा  का उल्लंघन करते हुए फायरिंग की। जिसके जवाब में आज मंगलवार को भारतीय सेना ने कहा कि ड्रैगन की सेना ने खुद फायरिंग की और आरोप हम पर लगा रहा है। भारत ने कहा चीन लगातार समझौते का उल्लंघन कर रहा है और आक्रामक रवैया अपना रहा है। जबकि सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

बयान के मुताबिक, ’07 सितंबर 2020 को चीन के सैनिकों ने एलएसी के साथ हमारे एक फॉरवर्ड पोजिशन के नजदीक आने की कोशिश की और जब उसके अपने सैनिकों ने उन्हें रोका तो चीनी सैनिकों ने अपने ही सैनिकों को उकसाने के लिए कुछ हवाई फायरिंग की। इतने उकसावे के बाद भी भारतीय सैनिकों ने बड़ा संयम दिखाया और अपने परिपक्व व्यवहार का परिचय दिया।’

बयान में आगे कहा गया कि भारतीय सेना शांति और शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि हर कीमत पर राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। भारतीय सेना के बयान में कहा गया है कि चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड की तरफ से जारी किया गया बयान उनके अपने लोगों को और इंटरनेशनल समुदाय को गुमराह करने के लिए है।

चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के ट्विटर हैंडल पर वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है, “भारतीय सेना ने एकबार फिर गैर-कानूनी रूप से शेनपाओ की पहाड़ियों में पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी तट के पास सोमवार को एलएसी का उल्लंघन किया।” ग्लोबल टाइम्स के एक दूसरे ट्वीट में प्रवक्ता के हवाले से कहा, “भारतीय सैनिकों द्वारा पीएलए के सीमा गश्ती दल के सैनिकों पर चेतावनी भरी फायरिंग करने के बाद चीनी सैनिकों को स्थिति को स्थिर करने के लिए जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

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दरअसल, चीन ने यह दावा ऐसे समय में किया है जब इस सप्ताह दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात 10 सितंबर को मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में होने वाली है। इस बैठक के लिए रवाना होने से एक दिन पहले सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन के संबंध सीमाओं पर अशांति से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को सीमा विवाद से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ महीनों से तनाव बना हुआ है। 29 और 30 अगस्त की रात भारतीय सैनिकों ने एलएसी पर पहाड़ों की चोटियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही चीनी सेना को न केवल रोका बल्कि पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चोटियों पर पोजिशन भी ले ली है। पैंगॉन्ग झील इलाके की बनावट ऐसी है कि जो भी सेना दक्षिणी किनारे के पास के इन पहाड़ों की चोटियों पर कब्जा कर लेती है, उसे पूरे इलाके में बढ़त मिल जाएगी।

इस वर्ष 15-16 जून की रात को एलएसी पर ड्रैगन के सैनिकों ने यथास्थित बदलने का प्रयास किया और लोहे की रॉड में कंटीले तार लगाकर गलवान घाटी में भारतीय जवानों पर अचानक हमला कर दिया था। चीनी सेना की इस नापाक हरकत से भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए जवाबी कार्रवाई में चीन के 43 सैनिकों के मारे जाने की बात सामने आई थी। चीन ने यह तो माना था कि उसके भी सैनिक हतातहत हुए लेकिन उसने संख्या की पुष्टि कभी नहीं की। इसके बाद से ही एलएसी पर तनाव की स्थिति है।

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