लॉकडाउन: खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, सोशल डिस्टेंसिंग का हुआ पालन

नई दिल्ली।कोरोना वायरस के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बीच भगवान केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार की सुबह मेष लग्न में पूरे विधिविधान के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। अब छह महीने तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना धाम में ही होगी। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय पूजा में पुजारी समेत सिर्फ 16 लोग ही शामिल हुए। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया।

तड़के तीन बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग द्वारा बाबा की समाधि पूजा के साथ अन्य सभी धार्मिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद तय समय पर सुबह 6.10 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए। देवस्थानम बोर्ड के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि संगम से मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर चार फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया है।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के कारण इस बार आम श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी नहीं बन पाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को खुल गए हैं। धाम को सुंदर फूलों से सजाया गया है। इस काम को अंजाम दिया है तीर्थनगरी के सतीश कालड़ा ने।

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सतीश ने बताया कि मंदिर को 10 क्विंटल फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया है। प्रतिवर्ष वह बदरीनाथ मंदिर को भी सजाने का कार्य करते हैं। केदारनाथ मंदिर को सजाने का सौभाग्य उन्हें पहली बार मिला है। इधर, उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सीमित संख्या में बोर्ड कर्मियों, हकूकधारी तीर्थ पुरोहितों एवं प्रशासन के लोगों को केदारनाथ धाम जाने की अनुमति दी गई है।

देवस्थानम बोर्ड को केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के लिए कोरोना संक्रमण से पूर्व दस लाख की ऑनलाइन बुकिंग मिल चुकी थी। ये सभी बुकिंग महाभिषेक पूजा व रुद्राभिषेक पूजा की थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण श्रद्धालु धाम नहीं जा पाएंगे। बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि ऑनलाइन जितनी बुकिंग मिली है, उनकी पूजा कर प्रसाद डाक से भेजा जाएगा।

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