मुकेश अम्बानी : लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की मदद से एक और लड़ाई जीतने के करीब हैं

मुकेश अम्बानी को अब अपने रिलायंस जियो के राह में आ रहे उस रोड़े पर जीत की उम्मीद दिखाई देने लगी है जिसके लिए वह कई बार TRAI और भारत सरकार के दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं। देश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले उद्योगपति मुकेश अम्बानी को ऐसा इसलिए भी लग रहा है क्योंकि उनकी एक मांग के समर्थन में एक बार फिर संसद के दोनों सदनों के सांसद सामने आये हैं।

इन सांसदों में अरुणांचल से लोकसभा सांसद निनोंग एरिंग, कांग्रेस नेता रशिद अल्वी, राज्यसभा सांसद मजीद मेमन, राजीभाई नवानी, भरत कुमार रावत और वाईबी सुब्बारेड्डी सहित कई नेताओं ने TRAI से कहा है कि TRAI को मोबाइल इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क (आईयूसी) को समाप्त कर देना चाहिए। बता दें कि वर्तमान में इंटर कनेक्ट चार्ज 14 पैसे है और जियो के आने के बाद बाकी टेलीकॉम कंपनियां इस शुल्क को बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। जबकि जियो ने आरोप लगाया कि दो प्रमुख आपरेटरों ने इससे 1.2 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली की है।

दरअसल दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा मोबाइल इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क (आईयूसी)  ख़त्म करने को लेकर लम्बे समय से चल रही बहस के सम्बन्ध में 20 जुलाई को एक खुले सत्र का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में मोबाइल इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क को लेकर लोगों से अपनी राय देने को कहा गया था। इस खुले सत्र में मौजूदा संसद सत्र के बावजूद लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसद पहुंचे।

कांग्रेस नेता अल्वी ने कहा कि मैं देश के गरीब के लिए खुद ट्राई के पास गया था। अल्वी ने बताया कि उन्होंने TRAI से 14 पैसे के मोबाइल टर्मिनेशन शुल्क ख़त्म करने की सलाह दी। उन्होंने कहा ‘नियामक ने खुद शीर्ष अदालत में कहा था कि 2014 तक यह 10 पैसे रहेगा और बाद में इसे समाप्त कर दिया जाएगा।

मुकेश अम्बानी के रिलायंस जियो ने टेलीकॉम इंडस्ट्री में कदम रखते ही एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन बड़ी जैसी कंपनियों को बड़ा झटका दिया। पहले से ही घाटे में चल रही इन टेलीकॉम कंपनियों को जियो के कारण अपने टैरिफ दरों में जोरदार कटौती करनी पड़ी थी। लेकिन मुकेश अम्बानी के जियो के सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम तब खड़ी हो गई जब देशभर से जियो के ग्राहक कॉल ड्राप की शिकायत करने लगे।

लोकसभा सदस्य निनॉन्ग इरिंग ने खुले सत्र में कहा, जब ट्राई ने उच्चतम न्यायालय से 2011 में कहा था कि वह 2014 में मोबाइल कॉल्स पर टर्मिनेशन शुल्क समाप्त कर देगा, तो इसे तक समाप्त कर दिया जाना चाहिए था। कम से कम अब इसे हटा दिया जाना चाहिए जिससे ग्राहकों पर बोझ कम हो सके और कॉल दरें और सस्ती हो सकें।

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अम्बानी की इस शिकायत के बाद ट्राई ने रिलायंस जियो को पर्याप्त इंटर-कनेक्शन प्वॉइंट्स मुहैया नहीं कराने पर तीन टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, आइडिया और वोडाफोन पर कुल 3,050 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। मुकेश अम्बानी जहाँ TRAI से लगातार इंटर कनेक्शन चार्ज को पूरी तरह से ख़त्म करने की बात कर रहे हैं तो बाकी टेलीकॉम कंपनियां इंटर कनेक्शन चार्ज की दरों को बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

मुकेश अम्बानी ने इसकी शिकायत दूरसंचार नियामक TRAI (ट्राई) से की। मुकेश अम्बानी का कहना था कि एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियां जियो के ग्राहकों को इंटर कनेक्शन पॉइंट उपलब्ध नहीं करवा रही है। जिस कारण जियो की कॉल लगातार फेल हो रही है। अम्बानी का कहना था कि टेलीकॉम के लाइसेंस नियमों के अनुसार टेलीकॉम कंपनियां दूसरी कंपनी को इंटर कनेक्शन देने से इंकार इंकार नहीं कर सकती।

ट्राई के नियमों की माने तो जब किसी टेलीकॉम कपनी का उपभोक्ता किसी दूसरी टेलीकॉम कंपनी के उपभोक्ता कॉल करता है तो पहली कंपनी को दूसरी कंपनी यानी कॉल रिसीवर कंपनी को चार्ज दें पड़ता है। यानी अगर कोई रिलायंस जियो का उपभोक्ता एयरटेल के उपभोक्ता को कॉल करता है तो रिलायन्स को प्रति मिनट 14 पैसे एयरटेल को इंटर कनेक्टिविटी चार्ज देना पड़ता है। ऐसे में अगर इंटर कनेक्टिविटी चार्ज बढ़ता है तो उन कंपनियों को ज्यादा लाभ होगा जिनके ज्यादा उपभोक्ता हैं।

 

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