खेमका और चतुर्वेदी के बाद अब 200 करोड़ का घोटाला पकड़ने वाले इस कमिश्नर से भी मिलिए

देश में सबसे मुश्किल अगर कोई काम है तो वह एक ईमानदार अधिकारी होना। हरियाणा के अशोक खेमका से लेकर आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के बाद उत्तराखंड के कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन भी इसी श्रेणी में आते हैं। इन अधिकारियों ने सिस्टम से दो-दो हाथ करते हुए बड़े घोटालों का खुलासा किया।

200 करोड़ से अधिक के इस घोटाले को उजागर करने में कुमाऊं मंडल के आयुक्त डी सेंथिल पांडियन का अहम योगदान है। पांडियन की छवि पहले से ही सख्त और ईमानदार अफसरों में रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एनएच-74 घोटाले की जाँच सीबीआई को सौंप दी है। जाँच में साफ़ हो चुका है कि इस घोटाले में उत्तराखंड सरकार को 200 करोड़ से ज्यादा का चूना लगा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने इस घोटाले में 6 अधिकारियों को भी सस्पेंड कर दिया।

सबसे पहले सेंथिल पांडियन स्कूलों में शिक्षकों की गैरहाजिरी से लेकर चकबंदी जैसे मामलों में अपने काम के लिए जाने गए। साल 2014-15 में उन्होंने फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पा रहे कई शिक्षकों को बर्खास्त किया। जिसके बाद प्राथमिक शिक्षक संघ ने उनको हटाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया।

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उत्तराखंड में एनएच-74 घोटाले में भष्ट अधिकारियों, नेताओं और माफियाओं ने किस तरह इस घोटाले को अंजाम दिया इसका खुलासा सेंथिल की ही जाँच से सामने आया था। इससे पहले उन्होंने मोबाइल हेल्थ वैन को लेकर 65 लाख रूपये का एक फर्जीवाड़ा भी पकड़ा था।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री से उनकी खटपट होती रही। इसका कारण यह भी था क्योंकि उस दौर के शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी पर भी कई अनियमितताओं के आरोप लगे। हरीश रावत की पसंद  होने के बावजूद उनको शिक्षा सचिव पद से हटाया गया।

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