सोशल मीडिया, ओटीटी और न्यूज वेबसाइट को लेकर मोदी सरकार का ऐक्शन, जारी की गाइडलाइंस

नई दिल्‍ली: सोशल मीडिया पर लगातार चल रही भ्रामक व फेक खबरों को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा ऐक्शन लिया है। केंद्र सरकार ने OTT प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया व न्यूज वेबसाइट्स के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। बेवसाइट के जरिए अब किसी धर्म या समाज को लेकर अफवाहें फैलाना ठीक नहीं होगा। सोशल मीडिया पर अब भ्रामक प्रचार की इजाजत नहीं होगी। अब दो प्रकार के सोशल मीडिया होंगे।

 

सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार की शिकायत करने के लिए तीन स्थानीय स्तर बनाएं जाएंगे, जिनमें यू, यू ए और यू 13 होंगे। तीन स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी, जिसमें चीफ कम्पलायन ऑफिसर, रेसिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर और नोडल ग्रीवांस ऑफिस की तैनाती करनी होगी।

 

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर कई तरह से गलत जानकारी शेयर की जाती है। जाति-धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने की कोशिश होती है। शिकायत के बाद सोशल मीडिया से 24 घंटे के अंदर कंटेंट को हटाना होगा।

 

ओटीटी प्लेटफॉर्म बाद में माफी मांगकर सामग्री हटाकर या नीतियां बदलकर बचते रहे हैं, लेकिन अब इन्हें सरकारी गाइडलाइन मानने पड़ेगी। इसके अलावा टि्वटर विवाद से नाराज सरकार अब सोशल मीडिया कंपनियों को नियंत्रण में रखने के लिए भी नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। अब ऐसा मुमकिन है कि सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर कोई फर्जी संदेश किसने और कब चलाया, सरकार ये जान सकेगी।

सोशल मीडिया, ओटीटी और न्यूज वेबसाइट के लिए नए नियमों के बारे में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावडेकर घोषणा करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के नोटिस के 72 घंटे के अंदर उसपर कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही टेक कंपनियों को शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और चीफ कंपलायंस ऑफिसर की तैनाती करनी होगी।

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जारी होंगी ये गाइडलाइंस

कानूनी एजेंसियों से तालमेल के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी करनी होगी।

हर छह महीने में शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी।

ओटीटी प्लेटफॉर्म को तीन स्तरीय व्यवस्था करनी होगी।

एक कंपनी के स्तर पर, दूसरा सैल्फ रेग्यूलेशन के लिए और तीसरा ओवरसाइट मैकेनिज्म।

दर्शकों की उम्र के हिसाब से ओटीटी के कंटेट का वर्गीकरण होगा- यू, यूए 7, यूए 13 आदि वर्गीकरण हिंसा, सैक्स, नग्नता, भाषा, ड्रग्स आदि के आधार पर भी होगा।

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