राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद : 2019 में ऐसे मोदी के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकते हैं

एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को भारी मतों से हरा दिया। कोविंद की इस जीत को राजनीातिक विशेषज्ञ मोदी का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक भी मान रहे हैं। 25 जुलाई को शपथ लेकर कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति का कारभार सभालेंगे।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा राजनीतिक मास्टर स्ट्रोक है। कोविंद के राष्ट्रपति बनते ही मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक स्तर को और भी बढ़ा दिया है। बीजेपी सिर्फ पहले अगड़ी जाति की पार्टी के लिए जानी जाती थी लेकिन इसके बाद उसकी पहुंच देशे की पिछड़ी जातियों तक भी पहुंचेगा।  मोदी के इस मास्टरस्ट्रोक से उनके गरीब, दलित और पिछड़े लोगों को समाज में आगे लाने के वादे को भी बड़ा बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कल के ट्वीट से कई तरह के संकेत देने की कोशिश भी की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी जताने की कोशिश की है कि उन्होंने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर दलित या बिहार कार्ड नहीं खेला बल्कि गांव से जुड़े एक आखिर कतार के व्यक्ति को महामहिम बनाने का काम किया।

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कोविंद और मीरा कुमार की ये लड़ाई दलित बनाम दलित की ही थी, लेकिन मोदी का ये मास्टर स्ट्रोक 17 दलों के समर्थन वाली मीरा कुमार पर भी भारी पड़ा। पिछड़ी दलित जाति के व्यक्ति का राष्ट्रपति चुना जाना काफी बड़ी बात है ।ये भारत में उसी तरह का बड़ा मोड़ है जिस प्रकार अमेरिका में 2008 में अफ्रो-अमेरिकन बराक ओबामा देश के राष्ट्रपति बने थे।

साफ है कि देश के दो सबसे बड़े पदों पर बीजेपी-आरएसएस से निकले हुए लोग विराजमान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नव-निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दोनों से ही BJP-RSS के बैकग्राउंड से हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि उपराष्ट्रपति पद पर भी वेंकैया नायडू काबिज हो सकते हैं। जिससे देश के तीन बड़े पदों पर बीजेपी-आरएसएस के लोग ही होंगे।

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