नीतीश कुमार: मैकेनिकल इंजीनियर ऐसे बना सियासत का चाणक्य, 7 दिन से 7वीं बार बनेगा मुख्यमंत्री

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिला है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार आज यानी सोमवार को सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पहली बार महज सात दिन के लिए मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार बीते दो दशकों में बिहार के मुख्यमंत्री पद पर छह बार काबिज हो चुके हैं। इस बार वह सातवीं बार में सत्ताशीर्ष से लेकर 7वीं बार अबतक सीएम का सफर।

घर का मुन्ना बना सूबे का चाणक्य

बिहार की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक मंझे हुए राजनेता हैं। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित नीतीश कुमार काफी सुलझे राजनेता माने जाते हैं। बिहार के पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले नीतीश कुमार का जन्म साल 1951 में बिहार के एक दलित परिवार में हुआ था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उपनाम मुन्ना है। नीतीश के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। नीतीश ने राजनीति के गुण जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नाडीज से सीखे थे। नीतीश ने 22 फरवरी 1973 को पेशे से इंजीनियर मंजू कुमारी सिन्हा से शादी की थी। नीतीश कुमार का एक पुत्र है जो बीआईटी से ग्रेजुएट है।

नीतीश के राजनीतिक करियर की शुरूआत साल 1977 में हुई थी। इस साल नीतीश ने जनता पार्टी के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। साल 1985 को नीतीश बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। नीतीश का राजनीतिक कद धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था। इसी बीच साल 1987 को नीतीश कुमार बिहार के युवा लोकदल के अध्यक्ष बन गए। नीतीश राजनीति में पारंगत हो ही रहे थे कि साल 1989 को नीतीश कुमार को जनता दल (बिहार) का महासचिव बना दिया गया। अब तक नीतीश ने अच्छी खासी राजनीतिक पहचान बना ली थी। साल 1989 नीतीश के राजनीतिक करियर के लिए काफी अहम था। इस साल नीतीश 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए। लोकसभा के लिए ये नीतीश का पहला कार्यकाल था। इसके बाद साल 1990 में नीतीश अप्रैल से नवंबर तक कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री रहे।

नीतीश कुमार का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता जा रहा था। साल 1991 में दसवीं लोकसभा का चुनाव हुए नीतीश एक बार फिर से संसद में पहुंचे। इसी साल नीतीश कुमार जनता दल के महासचिव बने और संसद में जनता दल के उपनेता भी बने। करीब दो साल बाद 1993 को नीतीश को कृषि समिति का चेयरमैन बनाया गया। साल 1996 में नीतीश कुमार 11वीं लोकसभा के लिए चुने गए। नीतीश साल 1996–98 तक रक्षा समिति के सदस्य भी रहे। साल 1998 में नीतीश फिर से 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए। 1998-99 तक नीतीश कुमार केंद्रीय रेल मंत्री भी रहे। एक बार फिर चुनाव हुए साल 1999 में नीतीश कुमार 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए। इस साल नीतीश कुमार केंद्रीय कृषि मंत्री रहे।

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साल 2000 नीतीश के राजनीतिक करियर का सबसे अहम मोड़ था। इस साल नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक चला। साल 2000 में नीतीश एक बार फिर से केंद्रीय कृषि मंत्री रहे। साल 2001 में नीतीश को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। साल 2001 से 2004 तक नीतीश केंद्रीय रेलमंत्री रहे। साल 2002 के गुजरात दंगे भी नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान हुए थे। साल 2004 में नीतीश 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए। साल 2005 में नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने। बतौर 31वें मुख्यमंत्री नीतीश का ये कार्यकाल 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक चला। 26 नवंबर 2010 को नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने।

नीतीश कुमार पहली बार तीन मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि बहुमत न जुटने पर उनकी सरकार सिर्फ सात दिन में गिर गई थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने पूर्ण बहुमत के साथ 24 नवंबर 2005 को दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जदयू और भाजपा की गठबंधन सरकार ने अपना कार्यकाल पूर्ण किया। फिर आया साल 2010, इस चुनाव में एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से प्रचंड बहुमत प्राप्त किया। उस समय एनडीए को 206 सीटें मिलीं। जदयू 115 जबकि भाजपा 91 सीटों पर जीतकर आयी थी।

मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने तीसरी बार 26 नवंबर 2010 को शपथ ली। एनडीए से अलग हो गए और सदन में बहुमत साबित कर बतौर मुख्यमंत्री बिहार के शासन की बागडोर संभाले रहे। 2014 में जदयू अकेले लोकसभा चुनाव में गया और जदयू की बड़ी हार के कारण नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी बनाया।

पार्टी के बड़े नेताओं और विधायकों के दबाव में नीतीश कुमार ने चौथी बार 22 फरवरी 2015 को फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2015 के चुनाव में जदयू महागठबंधन बनाकर राजद और कांग्रेस के साथ चुनाव में उतरा। नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन को 178 सीटों के साथ जनता ने सत्ता सौंपी। पांचवीं बार नीतीश कुमार 20 नवंबर 2015 को बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि राजद से मतभेद के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नीतीश कुमार ने फिर बीजेपी के सहयोग से छठी बार 27 जुलाई 2017 को बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ ली। अब फिर नीतीश कुमार एनडीए विधायक दल के नेता चुने गए हैं।

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