पेगासस जासूसी कांड: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, SIT जांच की मांग

नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों में हंगामे की वजह बना पेगासस जासूसी कांड अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में याचिका दायर करके कहा कि गया कि पत्रकारों, नेताओं और विभिन्न प्रभावशाली लोगों की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिये जासूसी की गई। याचिका में कहा गया कि जासूसी सरकार की एजेंसियों द्वारा कराई गई। याचिका में मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच कराई जाए।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एमएल शर्मा ने याचिका दायर करके कहा कि पेगासस कांड भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर गंभीर हमला है। उन्होंने कहा कि ”व्यापक स्तर पर बिना किसी तय जवाबदेही के निगरानी करना नैतिक रूप से गलत है। याचिका में कहा गया है, ‘निजता कुछ छुपाने की इच्छा नहीं होती। यह स्वयं की ऐसी जगह होती है, जहां हमारे विचार एवं हमारा अस्तित्व किसी ओर के उद्देश्यों के साधन नहीं होते हैं। यह गरिमा के लिए आवश्यक तत्व है।’ इसमें कहा गया है कि पेगासस का उपयोग केवल बातचीत सुनने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके उपयोग से व्यक्ति के जीवन के बारे में पूरी डिजिटल जानकारी हासिल कर ली जाती है और इससे ना केवल फोन का मालिक असहाय हो जाता है, बल्कि उसकी संपर्क सूची में शामिल हर व्यक्ति ऐसा महसूस करता है।’

याचिका पर आगामी दिनों में सुनवाई होने की संभावना है। इसमें कहा गया है कि जासूसी संबंधी इस खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि निगरानी प्रौद्योगिकी विक्रेताओं अत्यधिक बढ़ोतरी वैश्विक सुरक्षा और मानवाधिकार के लिए समस्या है। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ऐसा बताया जा रहा है कि एनएसओ ग्रुप कंपनी के ग्राहकों ने 2016 के बाद से करीब 50,000 फोन नंबर को निशाना बनाया है।

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