लद्दाख में घुसे 55 चीनी सैनिक, रुकवाया मनरेगा का काम, लेकिन भारतीय सेना ने कहा- नहीं हुई घुसपैठ

लेह/नयी दिल्ली : लद्दाख में चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुस आने की खबर है। भारतीय सीमा में घुसने के बाद चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच जबरदस्त कहासुनी हुई। बताया जाता है कि अभी तक चीनी सैनिक भारतीय सीमा में डटे हुए हैं। खबरों के मुताबिक चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पीएलए के 55 जवान लेह से 250 किलोमीटर पूर्व डेमचोक सेक्टर में घुए आए। भारतीय सीमा में घुसने के बाद चीनी सैनिकों ने वहां मनरेगा के तहत चल रहे रोड बनाने के काम को जबरदस्ती रुकवा दिया। चीनी सैनिकों ने दावा किया कि ये इलाका उनका है। इसके बाद उन्होंने तंबू डाल दिया वहीं भारतीय सेना के जवान भी मुस्तैदी से डटे हुए हैं। दरअसल चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा घुसने की खबर जैसे आईटीबीपी के जवानों को लगी वो मौके पर पहुंच गए. जिसके बाद दोनों देशों के जवानों के बीच कहासुनी होने लगी, लेकिन चीनी सैनिकों इलाके पर दावा करते हुए वहां से जाने से इनकार कर दिया. कहासुनी के दौरान दो ओर से बैनर लहराए गए।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर देमचोक क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच एक निर्माण कार्य को लेकर बुधवार से गतिरोध बना हुआ है. चीनी सैनिकों ने बुधवार को तब आपत्ति जतायी थी जब भारतीय सैनिक लेह के 250 किलोमीटर पूर्व में स्थित देमचोक में मनरेगा के तहत ग्रामीणों के लिए हॉट स्प्रिंग जल को जोड़ने के लिए एक सिंचाई नहर का निर्माण कर रहे थे. देमचोक के सामान्य क्षेत्र में स्थित हॉट स्प्रिंग स्थल पर बुधवार को सुबह 10 बज कर 55 मिनट पर भारतीय सेना और पीएलए के बीच गतिरोध पैदा हो गया जो रात तक जारी रहा.

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चीनी सैनिकों ने एलएसी पर मोर्चा संभाल लिया और काम रोकने की मांग की. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को कोई निर्माण कार्य शुरू करने से पहले एक-दूसरे की अनुमति लेने की आवश्यकता होती है. वहीं, भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच समझौते के अनुसार निर्माण कार्य के बारे में सूचना केवल तभी साझा करनी होती है, जब कार्य रक्षा उद्देश्यों से संबंधित हो. सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने बैनर लगा दिये हैं और वे वहां डटे हुए हैं. सेना तथा आइटीबीपी के जवान चीनी सैनिकों को एक इंच आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं. पीएलए दावा कर रही है कि यह क्षेत्र चीन का है. इस क्षेत्र में 2014 में भी ऐसी ही घटना हुई थी जब मनरेगा योजना के तहत निलुंग नाला पर सिंचाई नहर बनाने का फैसला किया गया था.

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