मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, अब लोकल खिलौनों के लिए वोकल होने का समय है

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान देशवासियों को अपने दायित्वों का एहसास है। देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है। पीएम ने कहा कि अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वोकल होने का समय है। पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना तभी हारेगा जब आप सुरक्षित रहेंगे, जब आप ‘दो गज की दूरी, मास्क जरुरी’, इस संकल्प का पूरी तरह से पालन करेंगे।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय नस्ल के कुत्ते भी बहुत अच्छे और सक्षम होते हैं। अब हमारी सुरक्षा एजेंसियां भी इन्हें अपने सुरक्षा दस्ते में शामिल कर रही हैं। अगली बार जब आप भी कुत्ता पालने की सोचें तो आप भी जरूर भारतीय नस्ल को ही घर लाएं। पीएम ने कहा कि इस जमाने में कंप्यूटर गेम्स का भी बहुत ट्रेंड है। लेकिन इनमें जितने भी गेम् होते हैं उनकी थीम्स अधिकतर बाहर की होती हैं। हमारे देश में इतने आइडियाज़ और कॉन्सेप्ट हैं। मैं देश के युवा से कहता हूं कि भारत में और भारत के भी गेम्स बनाइए।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में सितम्बर महीने को न्यूट्रिशन मंथ के रूप में मनाया जाएगा। नेशन और न्यूट्रिशन का बहुत गहरा सम्बन्ध होता है। हमारे यहां एक कहावत है- ‘यथा अन्नम तथा मन्न्म’ यानी जैसा अन्न होता है, वैसा ही हमारा मानसिक और बौद्धिक विकास भी होता है। पीएम ने कहा कि बच्चों के जीवन के अलग-अलग पहलू पर खिलौनों का जो प्रभाव है, इस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी बहुत ध्यान दिया गया है।

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खेल-खेल में सीखना, खिलौने बनाना सीखना, खिलौने जहां बनते हैं वहां की विजिट करना, इन सबको करिकुलम का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि खिलौने जहां ऐक्टिविटी को बढ़ाने वाले होते हैं, तो खिलौने हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं। खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं और मकसद गढ़ने वाले भी होते हैं। हमारे देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं। भारत के कुछ क्षेत्र खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं।

 

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