लॉकडाउन के बीच बीमार बच्चे के लिए मसीहा बना रेलवे, 28 घंटे में ट्रेन से पहुंचाया 1 लीटर ऊंटनी का दूध

नई दिल्ली। कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को कम करने के लिए देशभर में तीन मई तक लॉकडाउन (Lockdown) किया गया है। लॉकडाउन के दौरान लोगों को सामान लेने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी  बीच  मुंबई के रेलवे के अधिकारियों (Indian Railway) ने 26 अप्रैल काे एक पिता के निवेदन पर करीब 1500 किमी दूर 1 लीटर दूध (Camel Milk) पहुंचाकर उनकी समस्या का समाधान कर दिया है।

यह परिवार अपने बच्चे के बीमार पड़ने पर राजस्थान से ऊंट का दूध मंगवाया करता था लेकिन लाॅकडाउन के चलते यातायात व्यवस्था बंद होने की वजह से परिवार को दूध नहीं पहुंच पा रहा था। सिकंदराबाद तक दूध पहुचाने के लिए परिवार ने राजस्थान के फालना के नोडल ऑफिसर से सहायता मांगी। नोडल ऑफिस ने सेंट्रल रेलवे के मुंबई डिवीजन के चीफ कमर्शल इंस्पेक्टर जितेंद्र मिश्रा को पूरी समस्या से अवगत करवाया।

पार्सल ट्रेन के जरिए बांद्रा पहुंचा दूध

मामले की जानकारी मिलते ही जितेंद्र ने बच्चे तक जल्द दूध पहुचाने का फैसला लिया। जितेंद्र के अनुसार, राजस्थान के फालना के नोडल अधिकारी के माध्यम से उनको बच्चे के पिता की परेशानी का पता चला। फालना से सिकंदराबाद के बीच सीधे पार्सल सेवा नहीं होने की वजह से परिवार तक दूध नहीं पहुंच पा रहा है। इसके बाद जितेंद्र ने परिवार को सुझाव दिया कि अगर वह लुधियाना-बांद्रा टर्मिनस पार्सल ट्रेन के जरिए दूध बांद्रा तक भेज देंगे तो दूसरी ट्रेन के जरिये दूध सिकंदराबाद तक पहुंचा दिया जाएगा।

Gyan Dairy

एक घंटे में बांद्रा से सीएसएमटी पहुंचा दूध

दूध को कम समय में बच्चे तक पहुंचाने के लिए जितेंद्र ने राजस्थान, मुंबई और सिकंदराबाद के रेलवे के अधिकारियों से बात की। ट्रेन के बांद्रा पहुंचने के एक घंटे के भीतर ही दूध को विशेष वाहन के जरिए सीएसएमटी पहुंचाया गया। दूध को सीएसएमटी -सिकंदराबाद पार्सल ट्रेन के जरिये परिवार तक पहुंचा दिया गया।

सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ शिवजी सुतार के अनुसार, कोरोना के संकट काल में मध्य रेलवे अपनी पार्सल सेवा के माध्यम से मास्क, दवा समेत अन्य आवश्यक वस्तुएं लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है। ऐसे में बच्चे के पिता की तरफ से जल्द दूध पहुंचाने का निवेदन किया गया था। निवेदन प्राप्त होते ही हमारी टीम ने सभी से कॉर्डिनेट कर 28 घंटे में दूध परिवार तक पहुंचा दिया।  

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