एलजेपी में ‘टूट’ पर रामबिलास पासवान के भाई पशुपति पारस बोले- हमने पार्टी तोड़ी नहीं बचाई है

नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रहे रामबिलास पासवान के निधन को चंद महीने ही बीते हैं। इस बीच उनके भाई पशुपति कुमार पारस ने चार अन्य सांसदों के साथ मिलकर पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के खिलाफ बगावत कर दी है। इस बीच चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस ने पहली बार मीडिया से बात की। उन्होंने इसे मजबूरी में लिया गया फैसला बताया है। पशुपति ने कहा कि हमने पार्टी तोड़ी नहीं पार्टी बचाई है।

हाजीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे स्‍वर्गीय रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस ने कहा कि हम घुटन महसूस कर रहे थे। आठ अक्‍टूबर 2020 को रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी नेतृत्‍व ने कुछ ऐसे फैसले लिए जिनकी वजह आज पार्टी विलुप्‍त होने की कगार पर पहुंच गई है।

पशुपति ने कहा कि ‘हमने लोकसभा स्‍पीकर ओम बिड़ला से मिलकर उन्‍हें ताजा घटनाक्रम के बारे में एक पत्र सौंपा है।’ पशुपति कुमार पारस के अलावा चिराग पासवान से बगावत करने वाले सांसदों में उनके चचेरे भाई प्रिंस राज (लोजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष और समस्‍तीपुर से सांसद), चंदन सिंह , महबूब अली केशर और वीणा देवी शामिल हैं।

लोजपा ने लोकसभा चुनाव में बिहार से छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी उम्‍मीदवार सभी सीटों पर विजयी रहे थे। लोजपा का वोट शेयर 52% था। पार्टी में बढ़ते मतभेदों का उल्‍लेख करते हुए हाजीपुर के सांसद ने कहा कि पार्टी कैडर और लोजपा के 99 फीसदी नेता, एनडीए में बने रहना और साथ मिलकर बिहार चुनाव में उतरना चाहते थे लेकिन कुछ लोगों के प्रभाव में अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया गया और इसकी वजह से पार्ट को हुए नुकसान के बारे में हर कोई जानता है।

Gyan Dairy

पार्टी को एक बड़ा झटका पिछले अप्रैल महीने में तब लगा था जब इसके एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह ने सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में सत्‍ताधारी दल जद यू का दामन थाम लिया था। इस साल फरवरी में, लोजपा की एकमात्र एमएलसी और मंत्री नीरज कुमार सिंह की पत्‍नी नूतन सिंह ने पार्टी छोड़कर भाजपा ज्‍वाइन कर ली थी।

चिराग से रिश्‍ते का उल्‍लेख करते हुए पशुपति पारस ने कहा कि वह हमारे भतीजे हैं। परिवार के सदस्‍य हैं। मुझे यह कदम सिर्फ पार्टी को बचाने के लिए उठाना पड़ा है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी में लोकतंत्र समाप्त हो गया था। स्‍व.रामविलास पासवान के दिखाए रास्‍ते पर चलती रहेगी। उन्‍होंने कहा कि रामविलास पासवान के सपनों को साकार करने के लिए ही उन्‍हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्‍होंने चुनाव के दौरान और पिछले दिनों पार्टी छोड़कर चले गए नेताओं से अपील की कि वे पार्टी में लौट आएं।

बता दें कि रविवार को पशुपति पारस के नेतृत्‍व में पार्टी के 6 सांसदों में से 5 सांसदों ने चिराग पासवान के खिलाफ बगावत कर दी थी। सोमवार को चिराग को हटाकर पशुपति पारस पासवान को संसदीय दल का नया नेता चुन लिया गया है। चाचा के इस कदम के बाद लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं। बागी सांसदों ने उन्‍हें राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष मानने से भी इनकार कर दिया है।

Share