मोदी सरकार के पूर्व सहयोगी सुखबीर बादल का केंद्र पर हमला, किसानों को एंटी-नेशनल कहने की हिम्मत कैसे हुई

पंजाब और हरियाणा से शुरू हुए किसान आंदोलन ने अब विकराल रूप ले लिया है। वहीं एनडीए सरकार में पूर्व सहयोगी रहे शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर बादल ने गुरुवार को किसान आंदोलन पर बीजेपी सरकार पर तीखा वार किया। उन्होंने पूछा है कि क्या बीजेपी या किसी अन्य के पास किसी को भी एंटी-नेशनल कहने का अधिकार है? बादल ने कहा कि किसान आंदोलन में बुजुर्ग महिलाएं भी भाग ले रही हैं।

सुखबीर बादल ने कहा, ”किसान आंदोलन में बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं। क्या वे खालिस्तियों जैसी दिखती हैं? यह देश के किसानों को एक तरह से एंटी-नेशनल बुलाने का तरीका है। उनकी हिम्मत कैसे हुई किसानों को एंटी-नेशनल बुलाने की। यह देश के किसानों को एक तरह से एंटी-नेशनल बुलाने का तरीका है। उनकी हिम्मत कैसे हुई किसानों को एंटी-नेशनल बुलाने की।

सुखबीर बादल ने आगे कहा कि क्या बीजेपी या किसी और के पास किसी को भी राष्ट्र-विरोधी घोषित करने का अधिकार है? इन लोगों (किसानों) ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया है और अब आप उन्हें राष्ट्रविरोधी कह रहे हैं। जो लोग उन्हें देशद्रोही कह रहे हैं वे वास्तव में देशद्रोही हैं।

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वहीं, कृषि कानूनों के विरोध में अपना पद्म विभूषण पुरस्कार लौटाने वाले पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को लेकर सुखबीर बादल ने कहा कि वे अपनी पूरी जिंदगी में किसानों के लिए लड़ते रहे हैं। उन्होंने सरकार को कड़ा मैसेज देने के लिए अपना अवॉर्ड वापस किया है। उन्होंने कहा कि अगर किसान ये कानून नहीं चाहते हैं तो फिर केंद्र सरकार उन पर दबाव क्यों बना रही है।

बता दें कि अवॉर्ड वापस करने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने एक बयान में कहा है कि प्रकाश बादल ने भारत सरकार द्वारा किसानों के साथ की गई धोखाधड़ी और कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के चल रहे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन पर सरकार के रुख के विरोध में पद्म विभूषण लौटा दिया है। बादल ने कहा कि किसान जीने के अपने मूलभूत अधिकार की रक्षा के लिए कड़ाके की ठंड में कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।

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