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नीट को सुप्रीम कोर्ट से मिली हरी झंडी, 10 दिन के अंदर आ सकता है रिजल्‍ट : NEET Results 2017

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नैशनल एलिजिबिलिटी ऐंड एंट्रेंस टेस्ट (NEET) 2017 के रिजल्ट्स पर लगी रोक हटा दी है। कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है जसमें NEET 2017 के रिजल्ट पर रोक लगा दी गई थी। इस खबर के मिलते ही मेडिकल की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स ने राहत की सांस ली है।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह पहले से तय कार्यक्रम के आधार पर परीक्षा परिणाम की घोषणा और ऐडमिशन की प्रक्रिया का पालन करें। जस्टिस पीसी पंत और दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने कहा कि रिजल्ट की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसलिंग और ऐडमिशन कोर्ट के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) को निर्देश दिए हैं कि 26 जून से पहले NEET 2017 के नतीजे घोषित कर दिए जाएं। कोर्ट के आदेश के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही NEET 2017 के नतीजे घोषित किए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वे NEET 2017 से संबंधित किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह रिजल्‍ट जारी करे और काउंसलिंग शुरू करे। इसके बाद बताया जा रहा है कि बोर्ड 10 दिन के अंदर रिजल्‍ट जारी कर सकता है।

नीट रिजल्‍ट पर रोक का मामला करीब 12 लाख अभ्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। करीब साढे दस लाख छात्रों ने हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में परीक्षा दी थी, जबकि करीब सवा से डेढ लाख छात्रों आठ क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा में बैठे थे।

इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच द्वारा नीट रिजल्‍ट पर रोक लगाए जाने के बाद सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच ने 8 जून को नीट के नतीजे जारी करने पर रोक लगा दी थी।

गौरतलव है कि सीबीएसई ने शुक्रवार को देश में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट 2017 परीक्षा के नतीजों को प्रकाशित करने पर रोक के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई।

इस साल नीट का एग्‍जाम हिंदी और अंग्रेजी के अलावा अन्‍य आठ भाषाओं में हुआ था। मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर यह बात कही गई थी कि स्थानीय भाषाओं में पूछे गए सवाल अंग्रेजी भाषा में पूछे गए सवालों के मुकाबले आसान थे।

उच्च न्यायालय ने 24 मई को कई याचिकाओं पर नीट परिणाम के प्रकाशन पर अंतरिम रोक लगाई थी।याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा में एक जैसा प्रश्नपत्र नहीं दिया गया और अंग्रेजी तथा तमिल भाषाओं के प्रश्नपत्रों में बहुत अंतर है।

वहीं गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा गया था कि गुजराती में पूछे गए सवाल अंग्रेजी के मुकाबले कठिन थे। गुजरात में नीट मामले पर मंगलवार को सुनवाई की गई थी। वहीं सीबीएसई ने इस मामले में कहा था कि सभी पेपरों को मॉडरेटरों ने तय करके एक ही लेवल का निकाला था। बोर्ड का कहना है कि सभी भाषा में पेपर का डिफिकल्टी लेवल एक जैसा ही था।

नीट का आयोजन मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है।

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