‘स्वर्ण भारत परिवार’ ने सुमन शर्मा को बनाया जिला प्रभारी जयपुर, पियूष पंडित बोले- सिर्फ राष्ट्र सेवा है उद्देश्य

जयपुर: स्वर्ण भारत परिवार देश हित में लगातार सामाजिक कार्य करता रहता है इसके साथ साथ परिवार महिलाओं को भी आगे आने का पूरा मौका देता है। स्वर्ण भारत परिवार ने जयपुर टीम का विस्तार करते हुए , महिला शक्ति के रूप में कार्य कर रही जयपुर की होनहार महिला सुमन शर्मा को ट्र्स्ट में जयपुर प्रभारी का पद दिया है। अब जल्द ही कई सारे प्रोजेक्ट को जिले में सुमन शर्मा के निरीक्षण में लांच किया जाएगा। आने वाले कुछ दिनो में सेवानीति का प्रथम उद्देश्य लेकर स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पियूष पंडित यहां का दौरा कर सकते हैं। इस मौके की जानकारी जिला अध्यक्ष पूनम खनगरोत ने दी और कहां सेवानीति को हम पूरे प्रदेश में शुरू करेंगे और जरूरतमंदों को सहयोग करेंगे। उन्होने कहा कि सुमन को टीम में शामिल करने हेतु राष्ट्रीय कार्यकारिणी को धन्यवाद देती हूं, व सुमन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं। इस मौके पर अजिता सिंह ने स्वर्ण भारत के बारे में विस्तार से चर्चा की

Suman
पियूष पंडित, सुमन शर्मा

ज्ञान,सम्मान,सुरक्षा व एकता के मूल स्वरूप को साकार करता है स्वर्ण भारत परिवार

स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट , एक स्वैच्छिक संगठन है जो वट वृक्ष की तरह पूरे राष्ट्र व अब अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शाखाएं फैला रहा है। इस वट वृक्ष का रोपड़ 2010 में हुआ और विधिवत मान्यता 2017 में भारतीय पब्लिक ट्रस्ट एक्ट व भारतीय नीति आयोग द्वारा प्राप्त हुइ। समस्यायों को पहचानने और समाज में मौजूद समस्याओं को समाप्त करने के उद्देश्य से स्वर्ण भारत परिवार कार्य कर रहा है।

पियूष पंडित का कहना है, विकासशील और क्रांति शुरू करने के प्रयास में एक निष्पक्ष और निष्पक्ष रास्ता चुनना। एक क्रांति जो हमसे बड़ी है। एक क्रांति जो सभी समुदायों और उसके लोगों को एक साथ खड़े होने और ‘हम एक’ के रूप में मुख्य मुद्दों से लड़ने के लिए लाती है।

एक ऐसे समाज का निर्माण करने की दृष्टि जहां किसी भी परिवार में पैदा होने के कारण किसी में भी हीन जीवन की संभावना नहीं होनी चाहिए, जहां से वे आते हैं, वे क्या मानते हैं, या क्या उनकी विकलांगता है। एक ऐसा समाज जहाँ हर एक व्यक्ति में अपना जीवन यापन सम्मान से कर सकता है है, एक ऐसे जीवन के निर्माण में एक दृष्टिकोण जो हर एक को समान अवसर प्रदान करता है।

एक ऐसा जीवन जीने का मौका जो समानता सुनिश्चित करता है और समाज को देखने, बात करने, समझने और विश्वास करने में मदद करता है और यह सुनिश्चित करने के लिए एक रास्ता चुनता है कि हर व्यक्ति की समान संभावना है जो विकास, विकास, सुधार, बनाने / लाने में मदद करता है सकारात्मक परिवर्तन या भौतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और जनसांख्यिकीय घटकों को जोड़ना।

प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा जीवन जीने का अधिकार है, जो उसके लिए मानवाधिकारों का प्रयोग करने का अधिकार है जो जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार, दासता और यातना से मुक्ति, राय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और सम्मान का अधिकार है, काम और शिक्षा का अधिकार और बहुत कुछ।

हम उन लोगों को अलग करके राष्ट्र की सेवा करना चाहते हैं जो अपने लिए कुछ न कर पाने में अक्षम हैं य काबिल नहीं । हम हर मानव के अधिकारों की देखभाल, समर्थन और सुरक्षा में विश्वास करते हैं, चाहे वे बच्चे, बुजुर्ग, विकलांग, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं हों। हम गरीबी जैसी समस्याओं से निपटते हैं जिनका वास्तविक रूप से कुछ बड़ा प्रभाव पड़ता है जैसे कि बेरोजगारी, बुनियादी सेवाओं की कमी और आय उनकी शिक्षा की कमी, कुपोषण, घर और बाहर हिंसा, बाल श्रम, सभी प्रकार की बीमारियों और इन सभी पर स्वर्ण भारत की दृष्टि प्रतिबिंबित होती है। ऐसी समस्याएं देश में फैली एक बीमारी की तरह हैं।

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स्वर्ण भारत परिवार का उद्देश्य समग्र परिदृश्य में भारत का विकास करना है। और विशिष्ट परिवर्तन लाने के लिए समर्पण के साथ मुख्य मुद्दों से निपटना जो विकासशील और एक सामाजिक परिवर्तन लाने में मदद करेगा जो लोगों को उनकी मानवीय क्षमता और हमारे सुंदर राष्ट्र की क्षमता को प्राप्त करने की अनुमति देता है।

“हम यहां सिर्फ यहां बाते नही करते हैं, हम यहाँ हैं, निर्माण, विकास और जमीनी बदलॉव कर रहे हैं”

आइये जाने कुछ प्रश्नों द्वारा स्वर्ण भारत परिवार को

प्रश्न : स्वर्ण भारत कब से कार्य कर रहा है ?
उत्तर: स्वर्ण भारत 2010 से एक सामाजिक मंच की तरह कार्य कर रहा था, लेकिन विधिवत ट्रस्ट एक्ट व नीति आयोग में रजिस्ट्रेशन 2017 में करवाया गया ।

प्रश्न : स्वर्ण भारत की शाखाएं कहाँ कहाँ तक है ?

उत्तर: मुख्यतः केंद्र विंदु में कार्य क्षेत्र दिल्ली है । यहां से देश के सभी राज्यो में शाखाएं हैं साथ ही विदेशों में भी इस वट वृक्ष की शाखाएं सेवानीति के पुष्प से प्रदीप्तिमान हैं । देश के समस्त राज्यों …

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