सलाम: तेलंगाना की यह विधवा महिला बीमारु समाज की कुरूतियों को अकेले दे रही है चुनौती

देश में यूं तो महिलाओं से जुड़ी तमाम सामाजिक कुरीतियां मौजूद हैं। जिनकी वक़्त-वक़्त पर खत्म करने या कम से कम बदलने की कोशिशें की जाती रही हैं।

इस दौरान महिला को उसकी मांग से सिन्दूर, गले में से मंगल-सूत्र और हाथों में से चूड़ियां निकाल कर फेंकनी होती है।

लेकिन गाँव के रहने वाले वेंकेट रेड्डी की मौत के बाद उनकी पत्नी बिला कोमल ने ऐसा नहीं किया। दरअसल काफी लंबी बिमारी के बाद जब वेंकट की मौत हो गई तो कोमल को भी सदियों से चले आ रहे इन्ही रिवाज़ों को पूरा करना था। लेकिन उनके बच्चों ने इस पर ऐतराज़ जताया और उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया।

इन्ही कुरीतियों में से एक को खत्म करने के लिए वारंगल गाँव में नया कदम उठाया गया है।

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हम सब जानते हैं कि पति की मौत के बाद महिला विधवा हो जाने पर अपना शृंगार उतार देती है, जोकि उसके सुहागन होने की निशानी होती है।

इस कुरीति को खत्म करने में बाल विकास नाम के एनजीओ ने भी उनकी काफी मदद की। गाँव की पंचायत के सदस्यों और सरपंच ने इस परिवार के कदम को बहुत सराहा और इस कदम को आगे बढ़ावा देने की सलाह दी है।

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