सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा-शिलान्यस से कोई दिक्कत नहीं, मगर निर्माण-तोड़फोड़ पर रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नए संसद भवन के निर्माण को लेकर आज अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई फैसला नहीं सुनाया जाए तब तक ‘सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ के तहत कोई निर्माण या कुछ भी तोड़फोड़ नही होनी चाहिए और न ही कोई पेड़ काटा जाना चाहिए। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि आपने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर निर्माण की तारीख तय की है। इसपर आगे कोई काम नहीं होना चाहिए। हमें शिलान्यास से कोई परेशानी नहीं है लेकिन किसी तरह का निर्माण नहीं होना चाहिए।

बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 10 दिसंबर को नए संसद भवन के निर्माण के लिए आधारशिला रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि संसद का नया भवन 64,500 वर्गमीटर क्षेत्र में होगा और इसके निर्माण पर कुल 971 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। बिरला ने प्रस्तावित भवन के बारे में विवरण पेश करते हुए कहा था कि, ”लोकतंत्र का वर्तमान मंदिर अपने 100 साल पूरे कर रहा है।

यह देशवासियों के लिए गर्व का विषय होगा कि नए भवन का निर्माण हमारे अपने लोगों द्वारा किया जाएगा, जो आत्मनिर्भर भारत का एक प्रमुख उदाहरण होगा।” उन्होंने कहा, ”नए भवन के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता प्रदर्शित होगी। आशा है कि आजादी के 75 साल पूरे होने पर संसद का सत्र नए भवन में आयोजित होगा।” वहीं, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार झुक गई है। केंद्र ने अदालत से कहा कि हम केवल शिलान्यास करेंगे।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि निर्माण, तोड़फोड़ या पेड़ नहीं काटे जाएंगे। सुनवाई की शुरुआत मे ही अदालत ने कहा कि हम इसपर स्टे नहीं दे रहे हैं लेकिन आप जो भी करेंगे वो हमारे आदेशों के अधीन होगा। बेहतर होगा आप इस बात का ध्यान रखें। न्यायालय ने कहा कि केंद्र कागजी कार्रवाई के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन एक बार ढांचा खड़ा हो गया तो पुरानी स्थिति बहाल करना मुश्किल हो जाएगा।

Gyan Dairy

 

 

Share