5 लाख करोड़ के कालेधन की इस रिपोर्ट को न कभी कांग्रेस ने जारी किया न बीजेपी ने

काले धन पर बनी सरकारी कमीशन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2007 में भारत से बाहर अवैध रूप से 5.3 लाख करोड़ रुपए का कालाधन भेजा गया था। यह रकम सरकार के बाढ़ राहत बजट से मात्र 5 प्रतिशत कम है।

रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर ने 2009 -10 में 46,200 करोड़ रुपये का काला धन पैदा किया। ये उतनी की रकम है भारत में एयर इंडिया को पटरी पे लाया जा सकता था।

यह रिपोर्ट 2012 में बनी और साल 2013 में सीबीडीटी के सामने पेश की गई। उस वक्त देश में यूपीए की सरकार थी। यह तक कि यह रिपोर्ट वर्तमान एनडीए सरकार ने भी जारी नहीं की।

इसी तरह साल 2010 में इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट में ओवर बिलिंग के जरिये 2.3 लाख करोड़ के कालेधन का कारोबार हुआ। ये उतनी ही रकम है जितनी सरकार ग्रामीण भारत के विकास में खर्च करता है।

रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, वर्ष 2014 में 101 अरब डॉलर यानी करीब 6.38 लाख करोड़ रुपए की ब्लैकमनी भारत में आई, जो कि‍ 2013 के मुकाबले 11 फीसदी ज्‍यादा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल फाइनेंशियल इंटिग्रिटी (जीएफआई) की माने तो पिछले 10 सालों में भारत में 770 बिलियन डॉलर का कालाधन भारत आया लेकिन यह चीन से कम है।

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वहीँ ग्‍लोबल फाइनेंशि‍यल इंटिग्रि‍टी (GFI) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में देश से 1.36 लाख करोड़ रूपये का कालाधन बाहर भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार साल 2014  में जितने ब्लैकमनी देश से बाहर भेजी गई वह साल 2013 के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा है।

इस नई रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों से साल 2014 में विकासशील देशों से 620 से 970 अरब डॉलर बाहर भेजा गया।    रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों ने साल 2014-2015 में जितना कमाया उसका 14 से 24 फीसदी कालेधन के रूप में इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में कालेधन का 87 प्रतिशत कारोबार व्यापार की आड़ में होता है।

पैसा देश से बाहर भेजना चाहते हैं, तो आप वि‍देश से कुछ ऑर्डर करते हैं और आपको उसका एक भारी-भरकम बि‍ल मि‍ल जाता है। वि‍देश में बैठे अपने साथी को बि‍ल चुका देने के बाद एक्‍स्‍ट्रा पैसा आपके नाम पर अलग रख लि‍या जाता है। इसी तरह से कई बार में काफी पैसा बाहर जमा हो जाता है।

 

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