हथकरघा (Handloom) उद्योग से दूर की जा सकती है बेरोजगारी: पीयूष पण्डित

नई दिल्ली। स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष समाजसेवी पियूष पंडित ने गुरुवार को आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा, कि हथकरघा (Handloom) उद्योग कृषि क्षेत्र के बाद सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रदूषण रहित विकेंद्रीकृत कुटीर उद्योग है। यह उद्योग अपनी परंपरागत कलात्मकता एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

Handloom
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उन्होने कहा कि भारत में लगभग 43.5 लाख हथकरघा बुनकर अपना जीविकोपार्जन हथकरघा बुनाई से कर रहे हैं। हथकरघा उद्योग प्राचीन काल से ही भारत की उन्नति और कारीगरों की आजीविका के लिए आधार प्रदान करता आया है।

इस मौके पर क्रेता-विक्रेता संगम कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश अध्यक्ष डॉ सीमा मिश्र, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजिता सिंह ने हैंडलूम को वरीयता देने की सरकार से मांग की बात कहीं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य हथकरघा बुनकरों को अधिक से अधिक आर्डर मिले जिससे बुनकर अपना उत्पादन कार्य की निरन्तरता बनाए रखें। वर्तमान सरकार ने स्वदेशी दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने के इरादे से इस उद्योग को ग्रामीण क्षेत्र तक प्रसारित करने का उद्देश्य बनाया है।

कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़ी मुख्य अतिथि व ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख समाजसेवी रोशनी लाल ने कहा कि भारत में उत्पादित वस्त्रों का विक्रय एवं प्रदर्शन विभिन्न प्रदेशों के साथ-साथ विदेशों में भी किया जा रहा है। इससे विदेशी मुद्रा का अर्जन भी हो रहा है। भारत में लगभग 43.5 लाख हथकरघा बुनकर अपना जीविकोपार्जन हथकरघा बुनाई से कर रहे हैं। भारत सरकार को इस ओर और ध्यान देने की जरूरत जिससे पूरे विश्व मे भारतीय हैंडलूम की धाक जम सके

कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारी प्रवक्ता संतोष पांडेय, संदीप पांडेय प्रदेश महासचिव ने स्वर्ण भारत बुनकर सेवा केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग पर जोर देते हुए वन्दना शुक्ला अध्यक्षा दिशा फाउंडेशन ने भी सरकार से मांग की की युवा आत्मनिर्भर भारत तभी सम्भव जब भारतीय हैंडलूम को बढ़ावा मिलेगा

Gyan Dairy

इसके अंतर्गत मलमल छींट, दरी, खादी जैसी वस्तुएं बनाई जाती हैं और हथकरघा उद्योग से निर्मित सामानों का विदेशों में भी निर्यात किया जाता है, लेकिन वर्तमान में लोगों का मन हथकरघा उद्योग से भंग हो रहा है।

पीयूष पण्डित ने उत्तरप्रदेश की चर्चा करते हुए अपने विचार रखे कि पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में 3320 गाँवों में हथकरघा उद्योग चलाया जाता है, जिनमें 62822 परिवारों के 183119 लोग इस कार्य में लगे हैं। जिनमें से 104240 पुरुष और 78879 महिलाएं शामिल हैं। हाथ से बुनाई प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में होती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ कस्बों व नगरों में भी हाथ से बुनाई का काम होता है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल बुनकरों का 71.6 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में और 28.4 फीसदी कस्बों और नगरों में उपस्थित हैं। पुरुष तथा महिला बुनकरों का क्रमशः 66.3 फीसदी व 33.7 फीसदी योगदान है। इस मौके पर युवाओं के लिए स्वर्ण भारत परिवार ने युवा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से युवाओं को आर्थिक सहयोग देने की बात कही जिससे आसानी से वो हैंडलूम के व्यवसाय को कर सकते है जिससे आत्मनिर्भर युवा , आत्मिर्भर भारत की परिकल्पना आसानी से पूरी होगी ।

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