दक्षिणी राज्यों में ताकत बढ़ाएगा संघ, महिलाएं भी दिखेंगी अब खाकी में

देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक धार्मिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) अब शहरी केंद्रों की अपनी शाखाओं में महिलाओं को शामिल करना चाहता है।

इस मीटिंग में संघ ने फैसला लिया कि दक्षिणी राज्यों में बीते दिनों में उनके कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों से निपटने के लिए उन्हें ताकत बढ़ाने की जरूरत है।

कोयम्बटूर में हुए अपने तीन दिवसीय नेशनल काउंसिल की मीटिंग में इस बात पर सहमति बनी कि आरएसएस ‘राष्ट्रीय सेविका समिति’ के जरिये अपनी लगभग 10000 शाखाओं में महिला कार्यकर्ताओं को शामिल करेगा।

आरएसएस के प्रवक्ता का कहना है कि आरएसएस कोई आतंकी समूह नही बना रहा बल्कि ऐसा समूह खड़ा कर रहा है जो विरोध का सामना करने में सक्षम हो।

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आरएसएस की इस मीटिंग में यह भी फैसला किया गया कि दक्षिणी राज्यों में सीपीआई (एम)के हमलों से पीड़ित सैकड़ों बीजेपी और आरएसएस परिवारों के लिए एक राष्ट्रव्यापी निधि-स्थापना अभियान चलाया जायेगा।

इस बैठक में संघ ने माना कि उनके लिए फ़िलहाल सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनानी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में उनकी ठीक-ठाक पकड़ है।

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