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आखिर क्यों इस वैज्ञानिक ने 22 साल से नहीं जमा किया पानी का बिल

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दुनिया की बड़ी आबादी आज भी पीने के पानी के लिये जद्दोजहद कर रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जल संकट भविष्य में बड़ी समस्या होगी। उस स्थिति से निपटने के लिये अगर अभी से तैयारी नहीं की गई तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग ऐसी ही कोशिश है जिसके जरिए वर्षाजल का संचयन कर उसका इस्तेमाल कर हम अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

शिव कुमार कहते हैं, बंगलुरु में सूखे वर्षों को छोड़कर प्रतिवर्ष लगभग 900-1000 मिलीमीटर वर्षा होती है। वर्षाजल संचयन के माध्यम से वे सालाना 2.3 लाख लीटर पानी एकत्र कर लेते हैं जो उनके चार-पाँच सदस्यों के परिवार की प्रतिदिन की चार सौ लीटर पानी की जरूरत के हिसाब से काफी होता है, सूखे जैसी आपातकाल की स्थिति में भी उनका आसानी से काम चल जाता है।

रिपोर्टे की माने तो कर्नाटक स्टेट काउंसिल फॉर, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, बंगलुरु के वरिष्ठ वैज्ञानिक एआर शिवकुमार ने बीते 22 सालों से पानी के बिल का भुगतान नहीं किया है। दरअसल एआर शिव कुमार बिना पानी का कनेक्शन लिये वर्षाजल से अपने पूरे परिवार की पानी की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि न केवल नहाने धोने के लिये, बल्कि पीने के लिये भी वह बारिश के पानी का ही इस्तेमाल करते हैं।

विज्ञान काउंसिल के इस वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बीते दो दशकों से घर की छत पर वर्षाजल संचयन का संयंत्र लगा रखा है। उनके परिवार में पानी का इस्तेमाल बहुत सावधानी से किया जाता है। रसोई घर के सिंक से और वॉशिंग मशीन से निकले पानी की रीसाइक्लिंग कर उसका इस्तेमाल शौचालय के फ्लश में किया जाता है। रसोई में भी पानी की बर्बादी न होने का पूरा ध्यान रखा जाता है। दाल चावल व सब्जी फल आदि धोने के बाद उस पानी का इस्तेमाल लॉन के पौधों को सींचने में किया जाता है।

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