कोरोना से मौत होने पर परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा मिलेगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में जो तबाही मचाई है, उसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी। अब सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये मुआवजा देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एमआर शाह की विशेष पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ वकील एस बी उपाध्याय और अन्य वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पक्षकारों से तीन दिन में लिखित अभिवेदन दाखिल करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह कोविड-19 के कारण जान गंवाने वालों के आश्रितों को मृत्यु प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को सरल बनाए।

इससे पहले, केंद्र ने न्यायालय से कहा था कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इसका वित्तीय बोझ उठाना मुमकिन नहीं है और केंद्र एवं राज्य सरकारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। शीर्ष अदालत में एक हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा है कि आपदा प्रबंधन कानून, 2005 की धारा 12 के तहत ‘न्यूनतम मानक राहत’ के तौर पर स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना बढ़ाने एवं प्रत्येक नागरिक को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और तेजी से कदम उठाए गए हैं।

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