भारतीय बैंकों के सामने ‘आमदनी रुपया-उधारी अठन्नी’ वाली स्थिति क्यों आ गई है

वित्त वर्ष 2016 -17 में बैंकों के डिपाजिट में तकरीबन 11.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है लेकिन बैंकों द्वारा कर्ज देने में गिरावट रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। बैंकों से उधार लेने या क्रेडिट ग्रोथ में आयी यह गिरावट बैंकों को परेशान भी कर रही है।

इसका सबसे बड़ा असर तो एनपीए पर पड़ेगा क्योंकि बैंकों के उधर देने की दर से बैड लोन के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। वर्तमान में बैंकों का बैड लोन 10 फीसदी है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबि‍क, 31 मार्च 2017 को बैंकों की उधारी 78.82 लाख करोड़ थी।

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बीते वित्त वर्ष में बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ 60 सालों के सबसे निचले स्तर पर चला गया। इसे पहले 1953- 54 में क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट 1.7 फीसदी तक चली गई थी। वित्त वर्ष 2016-17 में यह क्रेडिट ग्रोथ 5.1 फीसदी रही। बैंकों से कर्ज नहीं लेने से बड़ा असर पड़ेगा।

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