क्या विपक्षी नेता राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहेगे, सोनिया गांधी का नमक खाने के बाद

राष्ट्रपति पद पर साझा उम्मीदवार खड़ा किये जाने के नाम पर विपक्षियों को एकजुट करने की राजनीति में ममता बनर्जी की सलाह पर सोनिया गांधी ने लंच(दोपहर भोज) का आयोजन किया। प्रणव मुखर्जी, वर्तमान राष्ट्रपति ने अपने पद पर दुबारा बने रहने के प्रश्न पर पहले ही असहमति जता दी थी।

विपक्षी नेताओं को नमक खिलाकर, नमक का फर्ज निभाने के लिये कांग्रेस की सोची समझी रणनीति के तहत लंच का आयोजन हुआ। राष्ट्रपति पद की बात तो खत्म हो चुकी थी मुद्दा था राहुल गांधी को प्रधान मंत्री पद का साझा उम्मीदवार घोषित करना या उस पर विपक्षी दलों की सहमति  लेना।

राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर सोनिया गांधी द्वारा लंच के आयोजन का उद्देश्य दूसरा ही लगता था और उसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु आम आदमी पार्टी को छोड़कर अन्य सभी विपक्षियों को एकजुट कराने का प्रयास लंच के माध्यम से किया गया था। आम आदमी पार्टी ने इस पर कोई खास प्रतिक्रिया नही दी है।

बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के न आने से कांग्रेस की पर्दे के पीछे से खेली जा रही चाल सफल न हो सकी।अंततः लंच में आये लोग नमक खा कर तो निकल गये पर कांग्रेस का मुद्दा मुद्दा ही बना रह गया। बाद में यह घोषणा कर दी गई कि राष्ट्रपति के पद पर अभी किसी के नाम पर आम सहमति नही बन सकी है और भाजपा द्वारा नाम घोषित करने के बाद,विपक्ष का उम्मीदवार घोषित होगा। बैठक में राहुल के चेहरे के हाव भाव किसी अन्य निर्णय की ही प्रातिक्षा में दिखाई दे रहे थे।

बैठक में कांग्रेस अध्य़क्ष सोनिया गांधी के अलावा उपाध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीवी अध्यक्ष शरद पवार, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, सीपीएम के सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, डीएमके की कनिमोझी, जेडीएल के एचडी देवगौड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल, जेडीयू नेता शरद यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अमर अब्दुल्ला, जेडीयू नेता के सी त्यागी, शरद यादव, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव जैसे कई बड़े नेता मौजूद थे जिन्होंने दोपहर भोजन का भी आनन्द लिया।

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इधर कांग्रेस पार्टी जल्दी ही सोनिया गांधी के स्थान पर राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाये जाने की तैयारी में जुटी है। 2019 का लोक सभा चुनाव कांग्रेस राहुल के नेतृत्व में लड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार सोनिया की गिरती छवि और स्वास्थ्य के कारण पार्टी को अधिक समय न देने के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। गांधी परिवार के अतिरिक्त कांग्रेस में कोई ऐसा चेहरा नही है जिसके हाथ मे पार्टी की कमान सौपी जा सके। इधर हाल में  हुए चुनाव में राहुल की छवि ठीक न होने के कारण मतदाताओं ने कांग्रेस की उपेक्षा ही की है। जिन प्रदेशो में कांग्रेस के प्रदेशीय नेताओ की छवि अच्छी थी वहां कांग्रेस को वोट भी अच्छे मिले।

राष्ट्रपति पद पर उम्मीदवार की चर्चा के नाम पर बुलाए सोनिया गांधी के लंच में कांग्रेस, बीएसपी, आरजेडी, जेडीयू, एसपी, जेएमएम, टीएमसी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, केरल कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी, आरएसपी, एआईयूडीएफ, आल इंडिया मुस्लिम लीग, सीपीएम, जेडीएस, सीपीआई सहित 17 दल शामिल हुए।

अब गांधी परिवार का नमक कितना असर दिखाता है,यह 2019 के लोक सभा चुनाव से पूर्व ही देखने को मिल पायेगा।यह गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने अभी कांग्रेस का नमक नही खाया है।

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