विप्रो ने अपने 600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, सवाल- क्या देश के 95% इंजीनियर जॉब के काबिल नहीं

देश में एक तरफ जहाँ रोजगार मिलने के आंकड़े न्यूनतम स्तर पर है। दूसरी ओर देश की तीसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो ने अपने 600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। भीतरखाने से खबर है कि यह संख्या 2000 तक जा सकती है। जबकि दिसंबर 2016 के आखिरी में कंपनी के नाम 1.79 लाख कर्मचारी थे।

हाल के दिनों में दुनिया के कई देशों में वीजा को लेकर दिक्‍कतें सामने आई हैं। इससे आईटी कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका सहित सिंगापुर न्‍यूजीलैंड जैसे देश अपने यहां वीजा के नियम सख्‍त कर रहे हैं।

विप्रो का कहना है कि वह हर साल रिगरस परफार्मेंस अप्रेजल प्रोसेस को अपनाता है। क्‍लाइंट की जरूरत को देखते हुए नई रणनीति के हिसाब से वर्कफोर्स के बारे में फैसला किया जाता है।

रोजगार आकलन से जुड़ी कंपनी ‘ऐस्पायरिंग माइंड्स’ ने एक अध्ययन के जरिये बताया है कि भारत में 95 प्रतिशत इंजीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी नौकरियों के लिए काबिल ही नहीं हैं।

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अध्ययन में सामने आया कि लगभग 4.77 प्रतिशत उम्मीदवार ही प्रोग्राम के लिए सही लॉजिक लिख सकते हैं, जो कि प्रोग्रामिंग जॉब की न्यूनतम आवश्यकता है। आईटी संबंधित कॉलेजों की 500 ब्रांचों के 36,000 से ज्यादा छात्रों ने ऑटोमेटा को चुना व दो तिहाई छात्र सही-सही कोड भी नहीं डाल सके।

स्टडी में सामने आया कि जहां 60 प्रतिशत उम्मीदवार सही से कोड नहीं डाल पाए, वहीं 1.4 प्रतिशत ही ऐसे निकले, जिन्होंने सही कोड डालने में महारत हासिल है।

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