ग्रीन कोर्ट ने श्री श्री रविंशकर को लताड़ा, ‘आपको जिम्मेदारी का बिल्कुल एहसास नहीं है’

देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत ने आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए पूछा है कि ‘क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. आपको लगता है कि आप जो मन में आया बोल सकते हैं?’

दरअसल विशेषज्ञों की टीम ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के सामने इस बात की गवाही दी है कि कई सौ एकड़ में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम की वजह से नदी का ताल पूरी तरह बर्बाद हो गया है. साक्ष्य में कहा गया कि इस नुकसान की भरपाई कम से कम 10 साल में हो पाएगी और इसमें करीब 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

गौरतलब है कि बुधवार को श्री श्री ने पिछले साल यमुना नदी के किनारे हुए तीन दिन के सम्मेलन के आयोजन के लिए सरकार और अदालत को जिम्मेदार ठहाराया था. उन्होंने कहा था कि यह तो सरकार और अदालत की गलती है कि उन्होंने इस कार्यक्रम की अनुमति दी.

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60 साल के श्री श्री की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने इन सभी आरोपों को नकारा है. रविशंकर ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि ‘अगर किसी तरह का जुर्माना लगाना ही है तो केंद्र, राज्य और एनजीटी पर लगाया जाना चाहिए जिसने इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी. अगर यमुना इतनी ही नाज़ुक और पवित्र है तो उन्हें वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल करने से हमें रोकना चाहिए था.’

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