अमर सिंह: विवादों से कम नहीं हुआ रसूख, CM से PM तक मानते थे लोहा

Amar singh

अमर सिंह: विवादों से कम नहीं हुआ रसूख, CM से PM तक मानते थे लोहा

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के रहस्यमयी और विवादित किरदार अमर सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। संसद उच्च सदन में बैठकर दिग्गज राजनेताओं को इशारे से किनारे करने वाले अमर सिंह ने आज सिंगापुर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। आज हम समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता व राज्यसभा सांसद रहे अमर सिंह के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को उजागर करेंगे।

अमर सिंह एक ऐसा इंसान जिसने अपने जीवन को पूरी तरह फ़िल्मी अंदाज़ में जिया। एक ऐसा इंसान जिससे आप नफरत कर सकते थे, लेकिन उसकी यारबाज तबीयत के दीवाने बने बिना नहीं रह सकते।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में 27 जनवरी 1956 को जन्मे अमर सिंह का बचपन कोलकाता के बड़ा बाज़ार में गुजरा, जहां उनके परिवार के लोग हार्डवेयर का व्यापार करते थे। अमर सिंह ने कोलकाता के ज़ेवियर कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद बैंगलोर चले गए और वहां व्यापार करने लगे।

बैंगलौर से ऐसे पहुंचे यूपी
अमर सिंह के राजनीति में आने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं हैं। साल 1985 में लखनऊ में कोलकाता के क्षत्रिय समाज की एक मीटिंग होती है। इसी कार्यक्रम के सिलसिले में अमर सिंह की मुलाकात यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह से हुई। पहली भेंट में ही वीर बहादुर सिंह ने अमर सिंह से प्रभावित हो गए और उन्हें लखनऊ शिफ्ट होने का न्योता दे दिया। अमर सिंह ने मौके का भरपूर फायदा उठाया और नवाबों के शहर में जम गए। इसके बाद उनके संबंध बॉलीवुड, कॉर्पोरेट, राजनीति के लोगों से बढ़ते चले गए।

ऐसे हुई मुलायम से करीबी
साल 1996 में मुलायम सिंह अपनी ग्रामीण परिवेश की पार्टी समाजवादी के अध्यक्ष के रूप में राजनीति कर रहे थे। इसी दौरान उनकी भेंट युवा अमर सिंह से हो गई। अमर सिंह का ग्लैमर मुलायम सिंह यादव के सिर चढ़ गया और अमर सिंह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता बना दिए गए। इसके बाद अमर सिंह ने राज बब्बर, आजम खान, रामगोपाल यादव, बेनी प्रसाद वर्मा को पीछे छोड़ दिया। अब अमर सिंह मुलायम के सबसे चहेते बन गए थे। अमर सिंह का साथ पाकर समाजवादी पार्टी की रंगत ही बदल गए। गांव, गरीब और किसान की बात करने वाली पार्टी बालीवुड, कॉर्पोरेट घरानों की चहेती बनती चली गई।

लगे बेहद गंभीर आरोप
फिर आया साल 2008। इस साल तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिका से परमाणु डील की। इस डील को लेकर सड़क से संसद तक खूब हंगामा हुआ। अमर सिंह ने मनमोहन सिंह की सरकार बचाई थी तो उस समय बीजेपी के तीन सांसद अशोक अर्गल, महावीर भगोरा, फग्गन सिंह कुलस्ते ने नोट लहराते हुए संसद में अपनी फोटो खिंचवाई थी। सांसदों की खरीद फरोख्त का आरोप अमर सिंह पर ही लगा था। इन सबका आरोप पॉलिटिकल मैनेजर अमर सिंह पर लगा, लेकिन डील पूरी हो गई और मनमोहन सरकार भी बच गई। इसके बाद तो अमर सिंह का कद बढ़ा देश की राजनीति में और बढ़ गया। इसके बाद में एक टेप और सामने आया जिसमे वो एक जज को सेट करने की बात कर रहे थे। इसके बाद एक कथित टेप आया, जिसमें बॉलीवुड की अभिनेत्री बिपाशा बासु और अमर सिंह की बाते थीं। अमर सिंह ने हमेशा इस बात को नकारा पर कहीं कहीं ये भी कहते पाए गए कि मेरी वाली आवाज मेरी है पर बिपाशा वाली किसी और की है। इतना ही नहीं बटाला हाउस एनकाउंटर में शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहन शर्मा के परिवार को इन्होंने दस लाख का चेक दिया, जो कि बाउंस हो गया। बाद में इन्होंने मोहन शर्मा को ही कुसूरवार ठहराया और मामले की जांच की मांग की।

सपा ने दिखाया बाहर का रास्ता
एक दौर था जब अमर सिंह और मुलायम सिंह एक सिक्के के दो पहलू माने जाते थे। लेकिन वक़्त और अमर सिंह को समाजवादी पार्टी से बाहर कर दिया गया। उनके साथ जया प्रदा को भी बाहर किया गया।

बच्चन परिवार से विवाद
जब सपा ने अमर सिंह और जया प्रदा को बाहर का रास्ता दिखाया तो अमर सिंह ने जया बच्चन को भी पार्टी छोड़ने की सलाह दी। हालांकि जया बच्चन ने अपना निर्णय लिया और समाजवादी पार्टी में बनी रहीं। यहीं से बच्चन परिवार के साथ उनकी खटास शुरू गयी

आजम खान से दुश्मनी
अमर सिंह और सपा नेता आजम खान साहब की दुश्मनी जग जाहिर है। दोनों नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोपों की झड़ी लगी रहती थी। आजम खान के इलाके रामपुर में जया प्रदा की खराब खराब तस्वीरें लगाई गयीं और वाहियात बातें लिखी गयीं। इतना ही नहीं अमर सिंह के परिवार को लेकर भी आजम खान की ओर से विवादित बयान दिए गए।

बनाई अपनी पार्टी, नाम दिया लोकमंच
अमर सिंह ने 2011 में राष्ट्रीय लोक मंच नाम से पार्टी बनायी। हालांकि इसके बैनर तले वह हर चुनाव हारे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *