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मध्य प्रदेश: राज्यसभा की तीसरी सीट बनी प्रतिष्ठा का प्रश्न, कमलनाथ-शिवराज और ज्योतिरादित्य दिखाएंगे सियासी बाजीगरी

मध्य प्रदेश: राज्यसभा की तीसरी सीट बनी प्रतिष्ठा का प्रश्न, कमलनाथ-शिवराज और ज्योतिरादित्य दिखाएंगे सियासी बाजीगरी
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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा को मिलना तय है। उच्च सदन की तीसरी सीट को लेकर दोनों दिग्गज पार्टियां सियासी समीकरण बनाने में लगी हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी पार्टी को तीसरी सीट जिताने के लिए सारी ताकत झोंक रहे हैं। वहीं सीएम कमलनाथ से जाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सबकी निगाह टिक गई है।

दरअसल राज्यसभा की एक सीट के लिए 58 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। वर्तमान संख्याबल के हिसाब से एक-एक सीट जीतने के बाद कांग्रेस के पास 56 वोट अतिरिक्त होंगे, जबकि भाजपा के पास महज 49 वोट बचेंगे। ऐसे में भाजपा को नौ जबकि कांग्रेस को दो अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी। कांग्रेस को अपने विधायकों के क्रास वोटिंग का ज्यादा डर सता रहा है। अगर सत्तारूढ़ दल के पांच से छह विधायक भाजपा के दूसरे राज्यसभा प्रत्याशी को वोट दे देते हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी हार जाएगा और भाजपा की जीत हो जाएगी।

बड़ी बात यह है कि कांग्रेस चाहकर भी इन विधायकों को अयोग्य घोषित नहीं करवा सकती है। अगर ऐसा होता है तो वह विधानसभा में अल्पमत में आ जाएगी। ऐसे में कांग्रेस अपने विधायकों को साधकर रखने की कोशिश कर रही है।राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए भाजपा को भी क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। अगर भाजपा के एक विधायक का प्रथम वरीयता का वोट कांग्रेस को मिल जाता है तब वह आसानी चुनाव जीत जाएगी। हालांकि बाद में उस विधायक को अयोग्य घोषित करवाने पर भी भाजपा को कुछ खास फायदा नहीं होगा।

मध्यप्रदेश के कोटे से खाली हो रही तीन सीटों में से दो भाजपा की हैं। अप्रैल में भाजपा के प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया का कार्यकाल पूरा हो रहा है। बता दें कि ये दोनों सांसद अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। ऐसे में इनकों तीसरी बार मौका देने की उम्मीद कम ही है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी इस बार राज्यसभा की सीट के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। अगर प्रभात झा का टिकट कटता है तब विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए खाली हो रही दो सीटों को लेकर जारी खींचतान के बीच एक सीट पर दिग्विजय सिंह की ताजपोशी तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए सज्जन सिंह वर्मा, बाला बच्चन और जयवर्द्धन सिंह समेत पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने प्रियंका गांधी के नाम की सिफारिश की है। लोकसभा चुनाव हार चुके ज्योतिरादित्य भी मुख्यमंत्री पद न मिलने के बाद राज्यसभा के जरिए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन, कमलनाथ ने प्रियंका गांधी की राज्यसभा के लिए दावेदारी जताकर सिंधिया को घेरने का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर रखा है। वहीं कमलनाथ के मंत्री मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और इमरती देवी खुलकर सिंधिया के समर्थन में हैं।

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