दिल्ली : मनीष सिसोदिया ने उठाए मोदी सरकार के ‘योजना प्रचार’ पर सवाल

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने केंद्र की मोदी सरकार की अहम् योजनाओं के प्रचार पर सवाल उठाते हुए जानकारी दी है कि सरकार बताये कि प्रचार के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई और भुगतान कैसे हुआ. सिसोदिया ने केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, मेक इन इंडिया और नरेंद्र मोदी ऐप पर सवाल उठाए हैं. सिसोदिया ने पीएम के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि ‘भारत सरकार इन योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया तथा ट्विटर, फेसबुक, गूगल, यूट्यूब पर विज्ञापन करती है. सरकार के इस तरह के विज्ञापन देने की प्रक्रिया के संबंध में आपसे कुछ जानकारी चाहता हूं.’

दरअसल दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जुलाई 2016 में हुए कार्यक्रम ‘टॉक टू एके’ में अनियमितताओं के आरोप हैं जिसमें सीबीआई उनकी भूमिका की जांच कर रही है. आरोप यही है कि इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए एक निजी कंपनी को बिना टेंडर ठेका दिया गया. उल्लेखनीय है कि हाल ही में दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट आई जिसका ऑडिट खुद दिल्ली ऑडिट विभाग ने किया है.

सिसोदिया ने पूछा है कि ‘सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने के लिए क्या कोई बिडिंग प्रक्रिया अपनाई गई थी? विज्ञापन के भुगतान किस सरकारी विभाग या निजी कंपनी ने किया? नरेंद्र मोदी ऐप्प किसने बनाया है? नरेंद्र मोदी पर मालिकाना हक़ किसका है? नरेंद्र मोदी ऐप्प के विज्ञापन पर कितना खर्च हुआ?’

ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली सरकार पर ही उंगलियां उठाई गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ही एजेंसी को 1 करोड़ 16 लाख का बोट का ठेका बिना ईं-टेंडरिंग या अखबार में विज्ञापन दिए किया गया. 5 लाख रुपये की लोकल स्टेशनरी खरीदी गई, लेकिन जब ऑडिट रिपोर्ट ने खरीददारी के कागज मांगे तो वह नहीं मिले. यमुना नदी का सर्वे करने के नाम पर एक एजेंसी को करीब 40 लाख रुपये का ठेका दिया गया लेकिन न इन्कम टैक्स काटा न ही लेबर सेस. यही नहीं, 2013 में सर्वे का ठेका दिया गया. 2014 में पूरा हुआ लेकिन इसका भुगतान 2016 में हुआ. ऑडिट में कहा गया है कि सर्वे एजेंसी को भुगतान देने में गड़बड़ी की संभावना है.

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