राजस्थान की सियासत: ‘बड़ी दिलचस्‍प है वसुंधरा राजे की प्रेम और राजनीति की कहानी’

नई दिल्ली। बीते कई दिनों से राजस्थान का सियासी घमासान पूरे देश में चर्चा का विषय बना है। मुख्यमंत्री अशोक गहलौत और उनके पूर्व सहयोगी सचिन पायलट की खींचतान राजस्थान से निकलकर शीर्ष अदालत की चौखट तक पहुंच गई। अब सारा दारोमदार पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे पर टिक गया है। माना जा रहा है राजस्थान की सियासत में महारानी के नाम से विख्यात वसुंधरा के इशारे पर राजस्थान कांग्रेस के कई विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे आज हम आपको बताएंगे वसुंधरा राजे की जिंदगी से जुड़ी कई अनोखी बातें।

वसुंधरा राजे सिंधिया ना सिर्फ एक सफल पॉलीटिशियन हैं बल्कि धौलपुर राजघराने की महारानी भी हैं। वसुंधरा राजे ग्‍वालियर के सिंधिया राजघराने की महारानी रही राजमाता विजया राजे सिंधिया की बेटी हैं। उनका जन्‍म 8 मार्च, 1956 को मुंबई में हुआ था।

साल 1972 में  वसुंधरा की शादी धौलपुर के राजघराने में हेमंत सिंह से कर दी गई लेकिन शादी के एक साल बाद ही दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अपने बेटे दुष्‍यंत के जन्म के बाद ही वसुंधरा अपने पति से अलग हो गई थीं। धौलपुर में कुछ समय बिताने के बाद वो वापिस अपने मायके ग्वालियर आकर रहने लगीं। वसुंधरा की मां विजया राजे पहले जनसंघ और फिर बीजेपी से जुड़ी थीं। वसुंधरा ने भी अपनी मां की तरह बीजेपी पार्टी से हाथ मिलाने का फैसला किया।

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1984 में वसुंधरा राजे ने राजनीति में कदम रखा। वो सबसे पहले बीजेपी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी बनीं। सबसे पहले उन्‍होंने भिंड से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्‍हें अपने पहले चुनाव में हार मिली। ये चुनाव हारने के बाद वसुंधरा ने अपने सुसराल का रुख किया और 1985 में उन्‍होंने ना सिर्फ धौलपुर से चुनाव लड़ा बल्कि जीता भी।

1987 तक वसुंधरा ने राजस्‍थान बीजेपी के उपाध्‍यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्‍जा कर लिया। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि अटल बिहारी वाजपेयी ने डनहें 1998-1999 के बीच अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। राजे को विदेश राज्‍यमंत्री का दर्जा दिया गया।

2003 में राजस्‍थान में विधानसभा चुनाव में वसुंधरा की पार्टी ने 110 सीटों से विजय हासिल की। उस समय राजस्‍थान में बीजेपी के दो कद्दावर नेता भैरोसिंह शेखावत और जसवंत सिंह दिल्‍ली में स्‍थापित थे। पार्टी की जीत पर भैरोसिंह को उपराष्‍ट्रपति बनाया गया, जसवंत सिंह को केंद्रीय मंत्री बनाया गया। ऐसे में भैरोसिंह शेखावत की पैरवी पर वसुंधरा राजे को राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री बनाया गया। वसुंधरा राजे राजस्‍थान की पहली महिला मुख्‍यमंत्री बनी थीं।

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