तमाम कोशिशों के बावजूद राहुल गांधी कांग्रेस को मंझधार से बाहर नहीं निकाल पा रहे है, अब पप्पू नहीं छोटू बनकर जीना होगा..

 

अगर राजनीति टी20 का खेल है, तो राहुल गांधी एक ऐसे बल्लेबाज है जो ओवर की पांच गेंदों पर डिफेंसिव शॉट खेलता है और छठी गेंद पर सिंगल लेता है.

विरोधी कप्तान भी दुआ करते हैं कि ऐसा बल्लेबाज आउट न हो बस क्रीज पर टिका रहे.

राहुल गांधी के आउट होने का कोई इरादा नहीं है. वे गली क्रिकेट उस खिलाड़ी की तरह हैं, जो सिर्फ इस वजह से कप्तान है, क्योंकि बैट उसी का है.

राहुल का कप्तानी पर फिर सवाल

यूपी के नतीजों के बाद कप्तानी पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं. मल्टीपल आर्गेन फेलियर की तरफ बढ़ रही कांग्रेस पार्टी की जिंदगी बचाने का रास्ता क्या होगा?

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रास्ता फिलहाल वही है, जो मणिशंकर अय्यर जैसे पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अपनी धीमी आवाज़ में सुझा रहे हैं.

खुद को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी को सम्मान का मोह छोड़ना पड़ेगा. इक्वल पार्टनर या जूनियर पार्टनर जहां जैसी भी जरूरत हो वहां गठबंधन करने होंगे.

2019 की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ विपक्षी राजनीति मोदी विरोध के इर्द-गिर्द घूमेगी.

कुछ राज्यों में कांग्रेस मोदी विरोधी गठबंधन में दूसरी नहीं बल्कि तीसरे नंबर की पार्टी होगी.

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