स्मृति ईरानी डिग्री मामला, कोर्ट का फैसला 18 अक्टूबर को

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ गलत शैक्षणिक जानकारी देने के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में चुनाव आयोग ने जानकारी दे दी है. चुनाव आयोग ने कहा है कि स्मृति की डिग्री से जुड़े जो दस्तावेज़ कोर्ट में दिए गए थे वो उनको सत्यापित करते  2004 के चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक 1993 में बारहवीं करने के बाद स्मृति ईरानी ने 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉरेसपॉन्डेंस में बीए किया 2011 और 2014 का हलफनामा एक ही है इसलिए डिग्री का विवाद ही गलत है.

पीपुल्स एक्ट की धारा 125A का मामला बनता है और इस धारा के तहत 6 महीने तक की कैद या जुर्माने की सजा हो सकती है लेकिन ऐसा तभी  होता है जब हलफनामे के तीन साल के भीतर शिकायत की जाए. जाहिर है स्मृति का साल 2014 का हलफनामा ही जांच के दायरे में है.

दरअसल हर चुनाव में कैंडीडेट हलफनामा देता है. जिसमें उसे अपनी पढ़ाई के बारे में भी बताना होता है. स्मृति ने भी तीन बार हलफनामे दिए और आरोप लगा की हर बार उनकी पढ़ाई के कॉलम में दी गई जानकारी बद.

smriti-1-580x395-1

Gyan Dairy

अगर चुनावी हलफनामे में कोई जान बूझकर लोगों को गुमराह करने की नीयत से झूठ बोलता है तो उस पर जनप्रतिनिधित्व कानून यानी रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपुल्स एक्ट की धारा 125A का मामला बनता है और इस धारा के तहत 6 महीने तक की कैद या जुर्माने की सजा हो सकती है लेकिन ऐसा तभी  होता है जब हलफनामे के तीन साल के भीतर शिकायत की जाए. जाहिर है स्मृति का साल 2014 का हलफनामा ही जांच के दायरे में है.

 

Share