दिवाली के बाद 13 महीने तक मकर राशि में रहेंगे गुरू, इन राशियों को होगा लाभ

आने वाले 14 नवंबर को दिवाली का पर्व है, वहीं कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी 19 नवंबर 2020 दिन गुरुवार को दिन में 10 बजकर 40 मिनट पर देवगुरु बृहस्पति अपने स्वाभाविक गोचरीय संचरण के क्रम में अपनी मूल त्रिकोण राशि धनु से शनिदेव की राशि मकर मे गोचरीय संचरण प्रारंभ करेंगे। देवगुरु एक राशि में लगभग 13 माह तक वक्री एवं मार्गी गति के साथ गोचरीय संचरण करते है। वर्तमान में देवगुरु अपनी राशि धनु में वक्री एवं मार्गी गति के साथ संचरण करते हुए लगभग 13 महीनों की यात्रा 19 नवम्बर 2020 दिन गुरुवार तक पूर्ण कर अगली राशि मकर में गोचरीय संचरण प्रारम्भ करेंगे। इस दौरान एक राशि आगे तक कि भी यात्रा करते हैं। 19 नवंबर दिन गुरुवार से देवगुरु 5 अप्रैल 2021 तक मार्गी होकर मकर राशि में गोचर करते रहेंगे। उसके बाद कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे। पुनः वक्री गति से वापस मकर राशि में आएंगे । इस प्रकार अपनी वक्री एवं मार्गी गति के साथ नीच राशि मकर में लगभग 13 माह तक विद्यमान रहकर चराचर जगत को पूर्ण रूप से प्रभावित करेंगे।

मेष :- दशमस्थ होने से कार्यों में सफलता, आंतरिक डर ,भूमि- वाहन सुख में तनाव के साथ वृद्धि, धन लाभ के साथ खर्च भी वृद्धि, पद प्रतिष्ठा में वृद्धि, कुटुम्भ में विवाद, माता का सुख परंतु स्वास्थ्य कष्ट दे सकता है। आन्तरिक शत्रु एवं रोग के प्रति सावधान रहें। वाणी व्यवसाय से लाभ।

उपाय :- राहु की आराधना अवश्य करें। पिला वस्त्र या सोना न पहनें।

वृष :- मानसिक तनाव समाप्त, पराक्रम एवं सम्मान में वृद्धि ,भाग्य का साथ मिलेगा, संतान पक्ष से शुभ समाचार, बुद्धि का सार्थक प्रयोग, कार्य क्षेत्र एवं दायित्वों में वृद्धि, राजनीतिक एवं सामाजिक दायरों में वृद्धि, पिता के स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी चिन्ता, लाभ में वृद्धि के निम्मित नया कार्य बनेगा, शत्रु पक्ष कमजोर होगा ।

उपाय:- गंगा स्नान इस अवधि में करें। झूठे वादे न करें।

मिथुन :- गृह एवं वाहन सुख में वृद्धि, माता का सहयोग की सानिध्य ,धन एवं धन के साधनों में वृद्धि ,यात्रा या खर्च में वृद्धि ,आंखों की समस्या में वृद्धि, पेट व पैर में कष्ट , पेशाब या किडनी की पुरानी या नयी समस्या में वृद्धि, दाम्पत्य एवं प्रेम संबंधों में शिथिलता या तनाव, परिश्रम एवं कार्य में अवरोध ।

उपाय :- श्मशान एवं धार्मिक स्थलों पर पीपल का वॄक्ष लगावें। झूठ न बोलें।

कर्क :- साझेदारी के कार्यो में तनाव ,दाम्पत्य या प्रेम संबंध को लेकर उलझन या तनाव के साथ वृद्धि के योग बनेंगे । आय एवं लाभ के साधनों में वृद्धि, व्यापार में वृद्धि , भाई बंधुओ एवं मित्रों का सहयोग, स्वास्थ्य में सुधार, भाग्य में अवरोध की स्थिति,राजनैतिक वर्चस्व एवं प्रभाव में वृद्धि।

उपाय:- व्यसन ,नाश से बचें।

सिंह :– आंतरिक शत्रुओ, आंतरिक रोग एवं कर्ज में वृद्धि, परन्तु शीघ्र ही विजय भी प्राप्त। प्रतियोगिता एवं चुनाव में विजय, धार्मिक अथवा यात्रा खर्च में वृद्धि, संतान पक्ष से चिन्ता, परिश्रम में वृद्धि, सम्मान में वृद्धि पेट व पैर में अचानक कष्ट एलर्जी या इन्फेक्शन में वृद्धि, धन वृद्धि के नए मार्ग बनेंगे।

उपाय:- गुरुवार को दक्षिण की यात्रा न करें। नीम का वृक्ष लगावें।

कन्या :- स्वास्थ्य एवं मनोबल में वृद्धि, अध्यात्म, तार्किकता एवं धार्मिक रुचि में वृद्धि , विद्याध्ययन में वृद्धि, लाभ या आय के साधनों में परिवर्तन या वृद्धि, गृह कलह में कमी परंतु सुख में भी कमी, भाग्य का साथ मिलेगा, बड़े भाई बंधुओ का सहयोग परंतु माता-पिता एवं जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी चिन्ता में वृद्धि ।

उपाय :- साधु एवं वृद्ध जनों की सेवा करें। पीपल का वृक्ष लगावें।

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तुला :- पराक्रम में अचानक कमी, सीने की तकलीफ में वृद्धि, गृह एवं वाहन सुख में वृद्धि पर खर्च या तनाव, पुराने रोग, कर्ज एवं शत्रु से मुक्ति ,भाई को कष्ट ,माता के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी अत्यावश्यक। यात्रा या धार्मिक अनुष्ठान पर खर्च, पद प्रतिष्ठा एवं नौकरी में प्रारम्भिक अवरोध के साथ वृद्धि। पिता का सहयोग।

उपाय :- गुरुवार को नमक न खायें तथा मंदिर में पीले वस्त्र दान करें।

वृश्चिक :- आय के साधनों एवं धन लाभ में वृद्धि परंतु धन संग्रह के प्रति थोड़ा सावधान रहें, उन्नति के नए अवसर, किये कार्यों में सफलता , दाम्पत्य एवं प्रेम संबंध में वृद्धि, पराक्रम एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि , माता – पिता भाई बन्धुओ का सहयोग सानिध्य में वृद्धि, विद्याध्ययन के क्षेत्र में परिवर्तन या अवरोध ,भाग्य एवं धार्मिकता में वृद्धि ।

उपाय :- किसी की आलोचना एवं बुराई से बचें। पुखराज रत्न धारण करें।

धनु :- लग्नेश-सुखेश होकर नीच राशि मे गोचर नकारात्मक सोच को जन्म देगा परंतु स्वगृही शनि के कारण धनागम होता रहेगा । पारिवारिक तनाव विशेषकर माता को लेकर तनाव,गले की समस्या, संग्रहित धन अचानक तीव्रता से खर्च,आन्तरिक रोग एवं शत्रो के कारण धन खर्च एवं मानसिक पीड़ा, व्यय ज्यादा, धर्म कर्म में अचानक अरूचि। पेट, पैर, लिवर एवं एलर्जी की समस्या परेशान करेगी।

उपाय:- चंदन-केशर का तिलक लगावें। बृहस्पति स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें।

मकर :- मानसिक तनाव या गुप्त चिन्ता में वृद्धि ,स्वास्थ्य पर खर्च अचानक परंतु अन्य खर्चो में कमी होगी, मनोबल में वृद्धि, संतान को लेकर अच्छी खबर मिल सकती है। अध्ययन अध्यापन से जुड़े लोगों की लाभ, बुद्धि का सकारात्मक प्रयोग। दाम्पत्य एवं प्रेम संबंधों में थोड़े टकराव के साथ समायोजन। धन संबंधित एवं अन्य कार्यो में भाग्य का सहयोग मिलेगा। भाई बंधुओं को कष्ट।

उपाय:- गुरुवार को ब्राह्मणों को दान दे एवं पिले वस्त्र न पहनें।

कुम्भ :- धनेश-लाभेश होकर व्यय भाव मे गोचर लाभ एवं धन के स्रोतों में अवरोध। व्यापार में परिवर्तन परंतु इस अवधि में कर्ज लेकर कार्य न करें। गृह एवं वाहन सुख एवं माता के सुख में वृद्धि। यात्रा पर खर्च, घर से दूर जाकर कार्यारम्भ हो सकता है जो लाभदायक होगा। वाणी पर संयम रखें। रोग,कर्ज एवं शत्रु पराजित होंगे। पेट की समस्या पर खर्च तनाव में वृद्धि। अनिद्रा भी हो सकती है।

उपाय :- प्रतिदिन गाय को गुण रोटी खिलावें।

मीन :- आय एवं लाभ के प्रकृति में परिवर्तन। व्यापार क्षेत्र में वृद्धि या परिवर्तन। एकाधिक क्षेत्रो से धनागम। दाम्पत्य सुख एवं प्रेम संबंधों में वृद्धि। साझेदारी से लाभ। अध्ययन-अध्यापन से जुड़े लोगो को लाभ। संतान की प्रगति के क्षेत्र से सुसमाचार, परंतु संतान के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। राजनैतिक वर्चस्व में वृद्धि।

उपाय :- पुखराज रत्न धारण करना लाभप्रद।

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