भगवत गीता: शंका करने वाले हमेशा रहते हैं दुखी, प्रसन्न रहने के लिए इन पांच बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के मुख से संसार को गीता का दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। इस पौराणिक महाकाव्य में जीवन की हर संभव परिस्थितियों को दिखाया गया है जिसमें मनुष्य आगे बढ़ने या उचित या अनुचित विचारों व कर्मों और उनके परिणामों का उदाहरण देखकर काफी कुछ समझ सकता है। जीवन में सफलता पाने के लिए इस महानतम महाकाव्य के धारावाहिक से भी कुछ सीख ली जा सकती है।

जीवन में सफलता पाने के लिए कुछ बातों को गांठ बांधकर अपने मन में बिठा लेना चाहिए जिससे कि आप हर मोड़ पर उन बातों को याद रखते हुए आगे बढ़ सकें। भागवत गीता में भी ऐसी बातें बताई गई हैं, जो आज के जमाने में भी सार्थक हैं। इन बातों को अपनाकर आप बेवजह आने वाली कई परेशानियों से बच सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे वह बातें, जिन्हें ध्यान में रखकर आप जीवन में सुखी रह सकते हैं।

गीता में बताया गया है कि जो व्यक्ति बिना वजह किसी पर संदेह करता है वह कभी खुश नहीं रह सकता। संदेह करने पर रिश्तों में कड़वाहट पैदा होती है। इसलिए बिना स्पष्ठ प्रमाण के किसी पर शक नहीं करना चाहिए।

गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वासना, गुस्सा़ और लालच ये तीनों चीजें नरक (कष्ट) के द्वार हैं। अगर आपको सुखी रहना है, तो आपको इन तीनों चीजों से दूर रहना चाहिए।

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गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जो भी जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। इसलिए जो चीज निश्चित है उसके लिए शोक किस बात का है।

गीता में भगवान कहते हैं कि हे पार्थ अगर कोई व्यक्ति बुद्धिमान है, तो उसे समाज की भलाई के लिए भी काम करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए भी योगदान देना चाहिए।

गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि हे पार्थ जो व्यक्ति भगवान को याद करते हुए मृत्यु को प्राप्त होता है वह सीधा भगवान के धाम को प्राप्त होता है।

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