कार्तिक पूर्णिमा को मनाते हैं देव दीपावली,ये है पौराणिक कथा

देव दीपावली कथा। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान शिव की नगरी काशी यानी बनारस में देव दीपावली मनाये जाने की पंरपरा है। इस बार देव दीपावली 29 नवंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और गंगा माता की पूजा की जाती है। संध्या के समय में गंगा आरती होती है। देव दीपावली के संदर्भ में दो पौराणिक कथाएं प्रचलित है। जिनमें एक कथा महर्षि विश्वामित्र तथा दूसरी भगवान शिव से जुड़ी है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जब विश्वामित्र जी ने देवताओं की सत्ता को चुनौती देते हुए अपने तप के बल से त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया। यह देखकर देवता अचंभित रह गए। इस पर देवता त्रिशंकु को वापस पृथ्वी पर भेजने लगे, जिसे विश्वामित्र ने अपना अपमान समझा। तब उन्होंने अपने तपोबल से उसे हवा में ही रोक दिया और नई स्वर्ग तथा सृष्टि की रचना प्रारंभ करने में लग गए। इससे देवता भयभीत हो गए। उन्होंने अपनी गलती की क्षमायाचना तथा विश्वामित्र को मनाने के लिए उनकी स्तुति प्रारंभ कर दी। अंतत: देवता सफल हुए और विश्वामित्र उनकी प्रार्थना से प्रसन्न हो गए। जिससे प्रसन्न देवताओं ने उस दिन दिवाली मनाई,जिसे देव दीपावली कहा गया।

Gyan Dairy

दूसरी कथा भगवान शिव से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, ए​क समय तीनों ही लोक त्रिपुर नाम के राक्षस के अत्याचारों से भयभीत और दुखी था। उससे रक्षा के लिए देवता भगवान शिव की शरण में गए। तब भगवान शिव ने कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को त्रिपुरासुर का वध कर दिया और तीनों लोकों को उससे मुक्ति दिलाई। उस दिन से ही देवता हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को भगवान शिव के विजय पर्व के रूप में मनाने लगे। इसी दीपोत्सव को देव दीपावली कहा गया।

Share