Janmashtami: श्रीकृष्ण जी को क्यों लगाया जाता है छप्पन भोग, क्या है मान्यता, जानें…

आज श्री कृष्ण की जन्म स्थली के साथ साथ पूरे देश भर में हर्षोल्लास के साथ जन्माष्टमी (Janmashtami) का त्योहार मनाया जा रहा है। हालांकि कोरोना वायरस के चलते मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्त श्रीकृष्ण के दर्शन करने आ रहे हैं। वहीं, कल सुबह से घरों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर दिन भर तैयारियां होती रहीं। लड्डू गोपाल के वस्त्र, पगड़ी, बांसुरी, झूला आदि खरीदने को लेकर बाजार में काफी भीड़ रही। इस साल कोरोना वायरस के कारण जन्माष्टमी की धूम नहीं दिख रही लेकिन फिर भी श्रीकृष्ण भक्तों में इस त्योहार को लेकर असीम श्रद्धा देखने को मिल रही है।लोगो सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दे रहे हैं।जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण पूजन को लेकर कई विधान हैं।कुछ लोग श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाकर प्रसाद के रूप में इन पकवानों को बांटते हैं।आइए, जानते हैं श्रीकृष्ण को क्यों लगाया जाता है छप्पन भोग-

श्रीकृष्ण को क्यों लगाया जाता है छप्पन भोग
ऐसा कहा जाता है कि गोकुल धाम में जब बालकृष्ण अपनी यशोदा मां के साथ रहते थे, तब उनकी मैय्या उन्हें प्रतिदिन आठ पहर अर्था कुल आठ बार खाना खिलाती थीं। एक बार जब इंद्रदेव ने गोकुल पर अपनी बारिश का कहर बरपाया था, तब श्री कृष्ण सात दिनों तक बिना कुछ खाए उस गोवर्धन पर्वत को एक ऊंगली पर उठाया था। जब बारिश शांत हो गई और सारे गोकुलवासी पर्वत के नीचे से बाहर निकले। इसके बाद सभी को यह एहसास हुआ कि कान्हा ने सात दिनों से कुछ नहीं खाया है। तब यशोदा और सभी गोकुलवासियों ने भगवान कृष्ण के लिए हर दिन के आठ पहर के हिसाब से सात दिनों को मिलाकर कुल छप्पन प्रकार (7 दिन X 8 पहर = 56) के पकवान बनाए थे। इसके साथ ही सभी गोपियों ने लगातार एक माह तक पवित्र यमुना नदी में स्नान किया और मां कात्यायिनी देवी की पूरे श्रद्धा से पूजा-अर्चना की ताकि उन्हें पतिरूप में श्रीकृष्ण ही मिलें। श्रीकृष्ण ने यह जानकर उन सभी को उनकी इच्छापूर्ति होने का आश्वासन दिया और इसी खुशी के चलते उन्होंने श्रीकृष्ण के लिए छप्पन भोग बनाए।

Gyan Dairy

56 भोग में कौन-कौन से पकवान रहते हैं शामिल
छप्पन भोग में वही व्यंजन होते हैं जो मुरली मनोहर को पंसद थे। आमतौर पर इसमें अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, पेय पदार्थ, नमकीन और अचार जैसी चीजें शामिल होती हैं। भोग को पारंपरिक ढंग से अनुक्रम में लगाया जाता है। सबसे पहले श्री बांके बिहारी को दूध चढ़ाया जाता है इसके बाद बेसन आधारित और नमकीन खाना और अंत में मिठाई, ड्राई फ्रूट्स और इलायची रखी जाती है। सबसे पहले भगवान को यह भोग चढ़ाया जाता है और बाद में इसे सभी भक्तों और पुजारियों में प्रसाद स्वरूप बांटा दिया जाता है।

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