करवा चौथ पर अखंड सुहाग की कामना को निर्जला व्रत रख दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य

नई दिल्ली। करवा चौथ की पूजा बुधवार को होगी। इस दिन पतिव्रता महिलाएं अपने अखंड सुहाग की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। दिन भर बिना निर्जला व्रत रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। उसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण तथा पारण कर व्रत पूरा करती हैं। करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है आपको बताते हैं। करवा चौथ के दिन जब सुहागन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं, तो वे चंद्रमा को साक्षी मानकर आराधना करती हैं।

माता पार्वती यानी चौथ माता से व्रती महिलाएं यह आशीर्वाद मांगती हैं कि जिस प्रकार सति सवित्री का सुहाग अमर हो गया, उसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिला, ठीक उसी प्रकार उनका भी सुहाग अखंड और अमर रहे। ज्योतिष तथा शास्त्रों में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। साथ ही चंद्रमा सभी औषधियों के स्वामी भी हैं। चंद्रमा की पूजा करने से आयु वृद्धि होती है तथा दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहता है। जिन लोगों का मन चंचल होता है, उन लोगों को चंद्रमा की पूजा करने का सुझाव दिया जाता है। चंद्रमा को दूध मिले हुए जल से अर्घ्य देने से नकारात्मकता दूर होती है, असुरक्षा और डर की भावना नहीं रहती। पति का स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बेहतर होती है।

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