हरेंद्र सिंह को आज जीत का तोहफा देना चाहेगी भारतीय टीम

जीत के अश्वमेधी रथ पर सवार भारतीय टीम पंद्रह बरस बाद जूनियर वर्ल्‍ड कप हॉकी फाइनल में आज शाम बेल्जियम के खिलाफ उतरेगी तो खिलाड़ी अपनी आक्रामकता और जुझारूपन को बरकरार रखते हुए देशवासियों को अर्से बाद हॉकी के मैदान पर खिताब तोहफे में देने के इरादे से उतरेंगे.

वही हरेंद्र अब 11 साल बाद उस हार के नासूर पर खिताब का मरहम लगाने को बेताब हैं. उनका मानना है कि मानसिक दृढ़ता और जीत की भूख इस बार इन खिलाड़ियों को खाली हाथ नहीं लौटने देगी जो कल अपने कैरियर का सबसे बड़ा मैच खेलेंगे. हरेंद्र ने कहा,‘हमने अतीत में कई गलतियां की है लेकिन एफआईएच के कोचिंग कोर्स से मैंने बहुत कुछ सीखा और इन खिलाड़ियों पर उसे लागू किया. शारीरिक फिटनेस, दबाव के आगे घुटने नहीं टेकना और मानसिक दृढ़ता यह इस टीम की खासियत है और मुझे नहीं लगता कि अब इसे खिताब जीतने से कोई रोक सकता है. उन्होंने कहा, मैं 2005 में रोटरडम में मिली हार को भूला नहीं हूं. वह हार आज तक मुझे कचोटती है लेकिन मैं टीम से इस बारे में बात नहीं करता. मैने खिलाड़ियों से सिर्फ इतना कहा कि हमें पदक जीतना है और रंग कौन सा होगा, यह आप तय करो.

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भारत तीसरी बार जूनियर वर्ल्‍ड कप के फाइनल में पहुंचा है. इससे पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराकर एकमात्र जूनियर वर्ल्‍ड कप जीता था. वहीं 1997 में इंग्लैंड में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था. भारत 11 साल पहले रोटरडम में कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन से पेनल्टी शूटआउट में हार गया था और उस समय भी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ही थे.

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